प्रदेश के धमतरी और गरियाबंद जिलों की सीमा पर घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर स्थित है, जिसे 'निरई माता मंदिर' के नाम से जाना जाता है।
छत्तीसगढ़। प्रदेश के धमतरी और गरियाबंद जिलों की सीमा पर घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर स्थित है, जिसे 'निरई माता मंदिर' के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की परंपराएं जितनी कठोर हैं, उतनी ही चमत्कारिक भी मानी जाती हैं।
मंदिर में हैं कई रहस्य
यह मंदिर छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध निरई माता मंदिर है। माँ का दरबार साल में केवल एक बार और वह भी सिर्फ 5 घंटे के लिए खुलता है। चैत्र नवरात्रि के पहले रविवार को यहाँ विशाल मेला लगता है और दर्शन होते हैं। मंदिर परिसर में महिलाओं का प्रवेश और प्रसाद ग्रहण करना पूरी तरह वर्जित है।
चैत्र नवरात्र में अपने आप ज्योति प्रज्ज्ववित होती है
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहाँ माता की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक पत्थर को ही देवी रूप में पूजा जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहाँ हर साल चैत्र नवरात्रि के दौरान अपने आप ज्योति प्रज्ज्वलित होती है, जो भक्तों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है। अपनी दुर्गम स्थिति और अनोखी मान्यताओं के कारण मंदिर के प्रति लोगों में भारी श्रद्धा है और दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ आशीर्वाद लेने पहुँचते हैं।
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