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यूपी में नाबार्ड का 9.13 लाख करोड़ के कर्ज वितरण..

यूपी में नाबार्ड का 9.13 लाख करोड़ के कर्ज वितरण का अनुमान

UP News : उत्तर प्रदेश में वित्त वर्ष 2026-27 में प्राथमिकता क्षेत्र के तहत 9.13 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरण का अनुमान है।

यूपी में नाबार्ड का 913 लाख करोड़ के कर्ज वितरण का अनुमान

यूपी में नाबार्ड का 9.13 लाख करोड़ के कर्ज वितरण का अनुमान |

UP News : उत्तर प्रदेश में वित्त वर्ष 2026-27 में प्राथमिकता क्षेत्र के तहत 9.13 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरण का अनुमान है। इसमें से करीब 34 प्रतिशत यानी 3.12 लाख करोड़ रुपये कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए तय किए गए हैं। नाबार्ड की उत्तर प्रदेश को लेकर जारी स्टेट फोकस रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि फसलों के लिए 2.14 लाख करोड़ रुपये के ऋण वितरण का आकलन किया गया है। यह कुल कृषि ऋण का लगभग 80 प्रतिशत हो सकता है। नाबार्ड ने इसे चुनौती बताते हुए कहा है कि इससे परिसंपत्ति निर्माण और उत्पादकता में अपेक्षित तेजी नहीं आ पाती। कृषि ऋण का बड़ा हिस्सा अब भी फसल उत्पादन के लिए ही जा रहा है।

नाबार्ड की रिपोर्ट में कृषि निवेश को बढ़ाने पर जोर देते हुए मशीनीकरण, सिंचाई और पशुपालन के लिए अधिक ऋण देने की सिफारिश की गई है। निवेश ऋण फिलहाल 55,579 करोड़ प्रस्तावित है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में कुल कृषि ऋण में निवेश ऋण की हिस्सेदारी करीब 31 प्रतिशत ही है, जबकि राष्ट्रीय औसत 40 प्रतिशत से अधिक है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि डेयरी क्षेत्र सबसे बड़ा उप-क्षेत्र बनकर उभरा है, जिसके लिए 22,102 करोड़ रुपये का ऋण अनुमानित है। इसके अलावा कृषि मशीनरी के लिए 11946 करोड़, पोल्ट्री के लिए 4632 करोड़, मत्स्य पालन के लिए 1532 करोड़ और भेड़-बकरी व सुअर पालन के लिए 3732 करोड़ का ऋण अनुमानित है। वहीं, कृषि अवसंरचना के लिए 20,092.80 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसमें गोदाम, साइलो, कोल्ड स्टोरेज पर खास जोर है।

नाबार्ड की रिपोर्ट के अनुसार कृषि से जुड़ी गतिविधियों, विशेषकर फूड प्रोसेसिंग के लिए 22,088 करोड़ रुपये के ऋण की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश देश में कृषि उत्पादन में आगे होने के बावजूद केवल करीब 6 प्रतिशत फसल का ही प्रसंस्करण हो पा रहा है। इसी कमी को दूर करने के लिए सरकार और बैंक प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने और ओडीओपी मॉडल से किसानों को जोड़ने पर जोर दे रहें हैं।

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