प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

नरोत्तम मिश्रा ने X पर जताया दर्द

दतिया उपचुनाव के बाद नरोत्तम मिश्रा ने X पर जताया दर्द

दतिया उपचुनाव के बाद पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने अपने और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को लेकर चल रही चर्चाओं को निराधार बताया है

दतिया उपचुनाव के बाद नरोत्तम मिश्रा ने x पर जताया दर्द

Narottam Mishra Expresses Pain on X |

भोपाल (MP): दतिया उपचुनाव के बाद पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने अपने और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को लेकर चल रही चर्चाओं को निराधार बताया है। नरोत्तम मिश्रा ने लिखा कि उपचुनाव के बाद सोशल मीडिया पर उनके और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को लेकर जो भ्रामक और असत्य बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि आशुतोष तिवारी उनके अनुज हैं और उनके प्रति उनके मन में हमेशा स्नेह और आत्मीयता रही है।

"हमारे बीच कभी कोई कटुता नहीं रही"

पूर्व गृहमंत्री ने कहा कि उनके और आशुतोष तिवारी के बीच न कभी कोई कटुता थी और न आज है। उन्होंने बताया कि दोनों की मुलाकात हमेशा की तरह गर्मजोशी और अपनत्व के साथ हुई। नरोत्तम मिश्रा ने आशुतोष तिवारी को भारतीय जनता पार्टी का कर्मठ, समर्पित और मेहनती कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि साल 2003 में डबरा विधानसभा चुनाव से ही उन्होंने आशुतोष तिवारी को एक ईमानदार कार्यकर्ता के रूप में देखा है।

संगठन और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का भरोसा

उन्होंने कहा कि वर्षों से आशुतोष तिवारी की कार्यशैली को करीब से देखा है और उन्हें पूरा विश्वास है कि वे संगठन और जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे। नरोत्तम मिश्रा ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ऐसा कोई कार्य, टिप्पणी या व्यवहार न करें जिससे पार्टी, संगठन या आशुतोष तिवारी को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि पार्टी की असली ताकत एकजुटता, अनुशासन और संस्कार हैं।

25 साल पुराने रिश्ते का किया जिक्र

पूर्व गृहमंत्री ने कहा कि आशुतोष तिवारी और उनके बीच 25 वर्षों का पारिवारिक रिश्ता है। उन्होंने कहा कि आशुतोष हमेशा उनके अनुज रहे हैं और वे उनके लिए अभिभावक की भूमिका में हैं। नरोत्तम मिश्रा ने अपने संदेश के अंत में कहा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन परिवार, संस्कार और रिश्ते हमेशा स्थायी रहते हैं।

यह भी पढ़े: 8 दिन का शोक, बंदर की मौत पर रो पड़ा पूरा गांव, तेरहवीं में खिलाई दाल-बाटी-चूरमा

Related to this topic: