नरसिंहपुर के केसली गांव में बारिश के बावजूद करीब 700 ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं, जबकि छह महीने पहले बिछाई गई पाइपलाइन ट्रांसफार्मर के अभाव में अब तक चालू नहीं हो सकी है।
Narsinghpur Village Faces Water Crisis Despite Monsoon, 700 Villagers Struggle for Drinking Water |
नरसिंहपुर (मध्य प्रदेश)। जिले के एक ग्रामीण इलाके से पानी को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है जहां के ग्रामीण बरसात के मौसम में भी पानी की बूंद बूंद को तरस रहे हैं, जिसको लेकर ग्राम वासियों ने प्रशासन से जल्द ही व्यवस्था कराए जाने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, बताया गया है कि जिले के चांवरपाठा जनपद का ग्राम केसली, जहां आसमान से पानी बरस रहा है, लेकिन जमीन पर बसे करीब 700 ग्रामीण आज भी पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं।
करीब छह महीने पहले बिछी पाइपलाइन
आमतौर पर पानी की किल्लत की तस्वीरें गर्मी में सामने आती हैं, लेकिन बारिश के मौसम में प्यासा गांव अपने आप में सिस्टम के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। सरकार ने 2019 में जल जीवन मिशन योजना के जरिए हर घर नल से जल पहुंचाने का संकल्प लिया था। केसली में करीब छह महीने पहले पाइपलाइन बिछा दी गई, घरों में नल भी लगा दिए गए। शुरुआती टेस्टिंग में करीब एक सप्ताह पानी आया, लेकिन उसके बाद नल सूख गए। वजह- बिजली कनेक्शन और ट्रांसफार्मर का इंतजार।
गांव के चार हैंडपंपों में से तीन बंद
गांव के चार हैंडपंपों में से तीन बंद हैं। एकमात्र चालू हैंडपंप पर ग्रामीण सुबह से ही कतार में लग जाते हैं। कुछ देर बाद पानी बंद हो जाता है, तो करीब एक किलोमीटर दूर नर्मदा घाट तक जाना पड़ता है। बारिश में नदी-नालों का पानी नर्मदा में मिलने के बावजूद यही पानी ग्रामीणों की प्यास बुझाने का सहारा है। वही इस समस्या को लेकर पीएचई अधिकारी सुनील परतेती ने माना कि ट्रांसफार्मर नहीं होने से छह महीने से योजना शुरू नहीं हो सकी और जल्द सर्वे कर ट्रांसफार्मर लगाने की बात कही है।
समस्या का जल्द समाधान कराने की मांग
लेकिन सवाल अब सिर्फ पानी का नहीं, जिम्मेदारी का है जमीनी स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी सरकार के जल जीवन मिशन योजना को क्यों पलीता लगा रहे हैं? जब योजना के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, तो केसली के ग्रामीणों के हिस्से का हक आखिर कहां अटक गया । वही ग्रामीणों ने जल्द इस समस्या का समाधान कराए जाने की मांग की है ।
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