यूपी के प्रयागराज जिले में गंगा नदी पर नैनी से झूसी के बीच बन रहे पुल (इनर रिंग रोड) और उससे जुड़े कार्यों में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को लेकर National Green Tribunal ने नाराजगी व्यक्त की है।
प्रयागराज। यूपी के प्रयागराज जिले में गंगा नदी पर नैनी से झूसी के बीच बन रहे पुल (इनर रिंग रोड) और उससे जुड़े कार्यों में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को लेकर National Green Tribunal (एनजीटी) ने नाराजगी व्यक्त की है।
739 करोड़ की परियोजना पर उठे सवाल
प्रयागराज में नैनी-झूंसी गंगा पुल (इनर रिंग रोड) का निर्माण National Highways Authority of India (एनएचएआई) और उसकी सहयोगी कंपनी GPT Infraprojects Limited करा रही है। यह परियोजना 739 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे केबल ब्रिज का हिस्सा है जो रिंग रोड परियोजना के अंतर्गत आता है।
बिना पर्यावरण मंजूरी के चल रहा काम
एनजीटी ने कहा कि एनएचएआई अनिवार्य पर्यावरणीय मंजूरी के बिना कंक्रीट बैचिंग प्लांट चलाने और मलबा डालने का कार्य कर रही है। एनजीटी ने इसे लेकर NHAI व GPT इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को फटकार लगाई है। नदी के बाढ़ क्षेत्र (floodplain) में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए एनजीटी ने इन संस्थाओं को पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने जिला गंगा समितियों को भी भविष्य में ऐसे निर्माणों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
NMCG की मंजूरी के बिना शुरू हुआ प्रोजेक्ट
एनजीटी ने कहा कि बिना पूर्व अनुमति के निर्माण कार्य शुरू करना नियमों के खिलाफ है। सुनवाई के दौरान NGT ने पाया कि शुरुआत में प्रोजेक्ट के लिए National Mission for Clean Ganga (NMCG) से मंजूरी नहीं ली गई थी। बाद में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अनुमति हासिल की और कंक्रीट प्लांट्स के लिए Uttar Pradesh Pollution Control Board (UPPCB) से भी कागजी मंजूरी ली गई।
भविष्य में सख्ती से पालन के निर्देश
NGT ने अपने आदेश में कहा कि भविष्य में NHAI को सख्ती से नियमों का पालन करना होगा और किसी भी काम से पहले NMCG की मंजूरी लेना जरूरी होगा। साथ ही कहा कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। एनजीटी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को निरीक्षण कर पर्यावरण के नुकसान का आकलन करने और जिला गंगा समितियों को भी भविष्य में ऐसे निर्माणों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। NGT ने अपने आदेश में कहा कि भविष्य में NHAI को सख्ती से नियमों का पालन करना होगा और किसी भी काम से पहले NMCG की मंजूरी लेना जरूरी होगा।
याचिका के बाद आया आदेश
एनजीटी ने यह आदेश प्रयागराज के भाकियू पुरवा के सचिव की याचिका पर दिया। आरोप था कि एनएचआई और उसकी सहयोगी कंपनी GPT इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने गंगा पर पुल निर्माण का कार्य राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) से पूर्व अनुमति लिए बिना शुरू कर दिया। एनजीटी ने UPPCB को निर्देश दिया गया है कि पुराने उल्लंघनों के लिए पर्यावरण मुआवजा तय करें। पहले लगाए गए 10 लाख रुपये के जुर्माने के अलावा अतिरिक्त वसूली भी की जाएगी, जिसे तीन महीने के भीतर पूरा करना होगा।
संयुक्त जांच टीम करेगी निरीक्षण
एनजीटी ने यह भी आदेश दिया कि UPPCB, प्रयागराज के डीएम और प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की एक संयुक्त टीम मौके पर जाकर जांच करें। अगर पर्यावरण को नुकसान पाया जाता है, तो जिम्मेदारों पर और जुर्माना लगाया जाएगा और सुधार के कदम भी तय समय में उठाने होंगे। NGT ने साफ कहा कि गंगा जैसे संवेदनशील नदी क्षेत्र में नियमों की अनदेखी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर प्रोजेक्ट को तय कानूनों का पालन करना ही होगा।
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