वाराणसी की केंद्रीय और जिला जेल में सजा काट रहे कई बंदी पढ़ाई के जरिए अपने जीवन को नई दिशा दे रहे हैं। जेल के पढ़े-लिखे बंदियों को साथी कैदियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।
उत्तर प्रदेश: वाराणसी की केंद्रीय और जिला जेल में सजा काट रहे कई बंदी पढ़ाई के जरिए अपने जीवन को नई दिशा दे रहे हैं। जेल के पढ़े-लिखे बंदियों को साथी कैदियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बदले उन्हें प्रतिदिन 80 रुपये का पारिश्रमिक मिलता है। पिछले पांच वर्षों में दोनों जेलों के 43 बंदियों ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया और सभी सफल रहे।
अलग-अलग कक्षाओं में होती है पढ़ाई
केंद्रीय कारागार में वाराणसी समेत 18 जिलों के बंदी निरुद्ध हैं। इस वर्ष हाईस्कूल के आठ और इंटरमीडिएट के 10 बंदियों ने बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया है। अलग-अलग सर्किल में कक्षाएं लगती हैं, जहां पढ़े-लिखे बंदी शिक्षक की भूमिका निभाते हुए साथियों को विभिन्न विषयों की तैयारी कराते हैं। जिला जेल में भी बंदियों के लिए पढ़ाई की व्यवस्था है। जेल प्रशासन किताबें और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराता है। इसके साथ कंप्यूटर, कढ़ाई, बुनाई समेत कई कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जाता है, ताकि रिहाई के बाद बंदी रोजगार से जुड़ सकें।
दो शिफ्ट में चलती हैं कक्षाएं
केंद्रीय कारागार में पहली शिफ्ट सुबह 7:30 से 10:30 बजे और दूसरी दोपहर 1:30 से शाम 4:30 बजे तक चलती है। पढ़ाई के लिए उम्र की कोई बाध्यता नहीं है। औपचारिक शिक्षा के साथ बंदियों को अलग-अलग हुनर भी सिखाए जाते हैं। जिला कारागार में 2022 से 2026 के बीच 25 बंदियों ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया। इनमें नौ हाईस्कूल और 16 इंटरमीडिएट के विद्यार्थी थे। वर्तमान में हाईस्कूल के नौ और इंटर के नौ बंदी परीक्षा पास कर चुके हैं, जबकि सात बंदी सजा पूरी होने के बाद रिहा हो चुके हैं।
रिहाई के बाद रोजगार से जुड़ने पर जोर
जिला जेल के अधीक्षक सौरभ श्रीवास्तव के अनुसार, बंदियों को किताबों के साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उनका कहना है कि रिहाई के बाद कई बंदी अपराध से दूर होकर रोजगार से जुड़ चुके हैं।
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