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छुईखदान में नहीं मिला शव वाहन

पोस्टमार्टम के बाद नहीं मिला शव वाहन, मालवाहक में शव ले जाने को मजबूर हुए परिजन

छुईखदान अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद एक मृतक के शव को घर पहुंचाने के लिए शव वाहन नहीं मिला, जिसके चलते परिजनों को मालवाहक वाहन में शव लेकर गांव जाना पड़ा।

पोस्टमार्टम के बाद नहीं मिला शव वाहन मालवाहक में शव ले जाने को मजबूर हुए परिजन

No Hearse Available, Family Forced to Transport Body in Goods Vehicle |

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (छत्तीसगढ़)। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर सामने आई है। छुईखदान अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद एक मृतक के शव को घर पहुंचाने के लिए शव वाहन नहीं मिला, जिसके चलते परिजनों को मालवाहक वाहन में शव लेकर गांव जाना पड़ा। घटना के बाद एक बार फिर मुक्तांजलि सेवा और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं।

छत से गिरकर हुई थी मौत

जानकारी के मुताबिक, ग्राम भुरसूली निवासी 50 वर्षीय जेलेब गोड की छत से गिरने के कारण मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के लिए शव को छुईखदान अस्पताल लाया गया। परिजनों का आरोप है कि पोस्टमार्टम के बाद शव को घर ले जाने के लिए काफी देर तक शव वाहन का इंतजार किया गया लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हो सकी।

मजबूरी में करनी पड़ी मालवाहक वाहन की व्यवस्था

आखिरकार मजबूरी में परिजनों को मालवाहक वाहन की व्यवस्था करनी पड़ी और उसी में शव रखकर गांव ले जाना पड़ा। अस्पताल परिसर से सामने आई तस्वीरों ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शोकाकुल परिवार को इस तरह की परेशानी उठाना मानवीय संवेदनाओं के विपरीत है।

पहले भी कई बार हो चुका है इस तरह का मामला

गौरतलब है कि जिले में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले झूरानदी में दो भाई-बहन की हत्या के मामले में भी शवों को कबाड़ वाहन से गांव ले जाया गया था। वहीं मोगरा के एक बच्चे की ट्रेन में मौत होने पर परिजनों को बस में शव लेकर खैरागढ़ आना पड़ा था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं।

वाहन नहीं मिलने पर उठे कई सवाल

मुक्तांजलि सेवा का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को अंतिम यात्रा के लिए सम्मानजनक और नि:शुल्क वाहन सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि घटना के समय शव वाहन उपलब्ध क्यों नहीं था? यदि वाहन किसी कारण से उपलब्ध नहीं था तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? पोस्टमार्टम के बाद काफी देर तक शव वाहन का इंतजार किया गया लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हुई। मजबूरी में मालवाहक वाहन से शव को गांव ले जाना पड़ा।

जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की उठी मांग

घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि भविष्य में किसी भी परिवार को अपने प्रियजन की अंतिम यात्रा के लिए ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं और संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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