राम मंदिर चंदा मामले की जांच के बीच ट्रस्ट कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि चंपत राय इस्तीफे से नाराज नहीं हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं।
अयोध्या: राम मंदिर के चंदे में कथित गबन मामले की जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय अपने इस्तीफे को लेकर किसी तरह की नाराजगी नहीं रखते और पूरी तरह स्वस्थ हैं। चंपत राय से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में गोविंद देव गिरि ने कहा, "मेरा मुख्य उद्देश्य उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेना था। वे स्वस्थ हैं, संतुष्ट हैं और अपने इस्तीफे को लेकर उन्हें कोई नाराजगी नहीं है। उन्हें किसी प्रकार की शिकायत नहीं है। मैंने कुछ स्थानीय संतों से भी मुलाकात की।"
स्थानीय संतों ने जताया संतोष
गोविंद देव गिरि ने बताया कि उन्होंने अयोध्या के कई स्थानीय संतों से भी मुलाकात की, जिन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के फैसलों पर संतोष जताया। उन्होंने कहा, "वे भी ट्रस्ट द्वारा लिए गए निर्णयों से सहमत और प्रसन्न हैं। हालांकि उन्होंने पूजा-पाठ और संचालन व्यवस्था के कुछ पहलुओं में और सुधार की अपेक्षा जताई है, जिसके लिए हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।"
चढ़ावे की व्यवस्था में किए गए बदलाव
कोषाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने उस स्थान का भी निरीक्षण किया, जहां मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती की जाती है। उन्होंने कहा, "मैंने वहां किए गए बदलावों को देखा। अब जो सावधानियां बरती जा रही हैं, उन्हें देखकर लगता है कि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा नहीं होगी।"
तीनों आरोपियों से पुलिस कर रही पूछताछ
इस बीच, स्थानीय अदालत द्वारा पुलिस हिरासत दिए जाने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों—लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडे—को अयोध्या जिला जेल से पूछताछ के लिए पुलिस लाइंस ले जाया। इनसे विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पूछताछ की जा रही है।
एसआईटी ने सीसीटीवी में दर्ज किए 70 संदिग्ध मामले
एसआईटी के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून के बीच की सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा में कथित तौर पर कुछ कर्मचारियों को नोटों के बंडल और नकदी अपने कपड़ों, जेबों, जूतों तथा अन्य स्थानों पर छिपाते हुए देखा गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि कुछ अन्य कर्मचारी भी इन गतिविधियों में सहयोग करते या उन्हें छिपाते नजर आए। समीक्षा अवधि के दौरान कथित चोरी या हेराफेरी के करीब 70 मामलों की पहचान की गई है।
छह लोगों को प्रथम दृष्टया माना गया संलिप्त
एसआईटी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज, वित्तीय रिकॉर्ड, बरामद दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रामाशंकर मिश्रा को प्रथम दृष्टया इस मामले में संलिप्त पाया गया है।
(एएनआई)
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