उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के परिषदीय विद्यालयों में तैनात बीएड योग्यताधारी शिक्षकों के लिए ब्रिज कोर्स कराने का जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य के परिषदीय विद्यालयों में तैनात बीएड योग्यताधारी शिक्षकों के लिए ब्रिज कोर्स कराने का जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है। शिक्षकों को सेवा में बने रहने और प्रमोशन के लिए यह कोर्स करना जरुरी है। शासन ने यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुपालन में दिया है।
छह महीने का ब्रिज कोर्स कराने की प्रक्रिया हुई शुरू
सुप्रीम कोर्ट से पूर्व में जारी आदेश के क्रम में परिषदीय विद्यालयों में तैनात बीएड योग्यताधारी शिक्षकों को छह महीने का ब्रिज कोर्स कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे लगभग 33 हजार शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी। दरअसल, पूर्व में परिषदीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 के लिए बीएड योग्यता को अमान्य कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अंशुमान सिंह बनाम नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन व अन्य में 8 अप्रैल 2024 को आदेश जारी किया था। इसमें वर्तमान में तैनात शिक्षकों को छह महीने के ब्रिज कोर्स कराने का आदेश दिया गया था।
ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग कोर्स के लिए 25 दिसंबर तक रजिस्ट्रेशन
यूपी के बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में राज्य के सभी बीएसए को निर्देश जारी करके बीएड योग्यता धारी शिक्षकों को ब्रिज कोर्स कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि बीएड योग्यताधारी शिक्षकों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) से छह महीने का ब्रिज कोर्स ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग विधि से कराया जा रहा है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन 25 दिसंबर तक किए जाएंगे। उन्होंने सभी बीएसए को बीएड 'योग्यता धारी शिक्षकों का इस कोर्स के लिए रजिस्ट्रेशन कराने का निर्देश दिया है। आदेश में कहा गया है कि ब्रिज कोर्स को निर्धारित समय पर न पूरा करने वाले बीएड योग्यताधारी शिक्षकों की नियुक्ति को अमान्य कर दिया जाएगा। इसके लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे। विभाग के अनुसार प्रदेश में लगभग 33 हजार शिक्षक इस निर्णय से प्रभावित हैं।
इस कोर्स के शुल्क को लेकर शिक्षकों में असमंजस है। शिक्षकों के मुताबिक कोर्स के लिए शुल्क लगभग 25 हजार रुपये है। यह शुल्क विभाग देगा या नहीं इसे लेकर स्पष्ट निर्देश नहीं है। पूर्व में यह शुल्क विभाग देता था।
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