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बाराबंकी में बारिश से धान की फसल बर्बाद

बाराबंकी में बारिश से धान की फसल बर्बाद, मुआवजे के लिए भटक रहे किसान

बाराबंकी की रामनगर तहसील के तराई क्षेत्र में अर्णव चक्रवात के कारण हुई भारी बारिश से धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में फसल गिरकर पानी में डूब गई है और कई जगह धान की बालियां सड़ने लगी हैं।

बाराबंकी में बारिश से धान की फसल बर्बाद मुआवजे के लिए भटक रहे किसान

बाराबंकी में बारिश से धान की फसल बर्बाद |

बाराबंकी: तहसील रामनगर के तराई क्षेत्र में अर्णव चक्रवात के चलते हुई बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पहले लगातार चार दिन तक हुई बारिश से धान की फसल प्रभावित हुई थी। इसके बाद 28 से 31 अक्टूबर तक हुई बारिश ने बची हुई फसल को भी बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया है। खेतों में धान की फसल गिरकर पानी में डूब गई है। कई जगहों पर धान की बालियां सड़ने लगी हैं। महीनों की मेहनत बर्बाद होते देख किसानों की आंखों से आंसू छलक रहे हैं।

बारिश और चक्रवात ने बर्बाद की धान की फसल

रामनगर क्षेत्र के लोहटी जई गांव के किसान श्याम मोहन ने बताया कि उन्होंने पत्नी की झुमकी 40 हजार रुपये में गिरवी रखकर किसी तरह 20 बीघा खेत में धान की खेती की थी। पहले हुई बारिश से फसल की बढ़वार प्रभावित हुई और अब चक्रवात के कारण धान खेतों में गिरकर पानी में डूब गया। कटाई के बाद खेतों में पड़ी फसल भी बारिश की भेंट चढ़ गई। उन्होंने सरकार से आर्थिक सहायता की गुहार लगाते हुए कहा कि अब उनके पास कुछ नहीं बचा है। उन्हें बस कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है। किसान रामदयाल मिश्रा ने बताया कि उनकी 10 बीघा धान की फसल खेत में पड़ी-पड़ी सड़ रही है। उन्होंने धान की बालियां दिखाते हुए अपना दर्द बयां किया। वहीं, झेंगई रावत का कहना है कि उन्होंने भी 10 बीघा धान लगाया था, लेकिन अभी तक अन्न का एक दाना घर नहीं पहुंच सका। खेती के लिए लिया गया कर्ज अब चिंता का कारण बन गया है। 

फसल नुकसान के सर्वे और मुआवजे को लेकर किसानों में नाराजगी

किसानों का आरोप है कि तहसील प्रशासन की ओर से खेतों में पहुंचकर नुकसान का वास्तविक सर्वे नहीं किया गया। उनका कहना है कि लेखपालों द्वारा मुआवजे के ऑनलाइन आवेदन का पोर्टल बंद होने की जानकारी दी जा रही है। कई किसान खुद तहसील पहुंचकर खतौनी, आधार कार्ड और बैंक पासबुक जमा कर रहे हैं। किसानों को आशंका है कि सर्वे और आवेदन प्रक्रिया में आ रही दिक्कतों के चलते वे सहायता से वंचित रह जाएंगे। कई किसानों ने नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराने, मुआवजे की राशि बढ़ाने और पोर्टल दोबारा खोलकर सभी पात्र किसानों को सहायता देने की मांग की है। इस संबंध में तहसीलदार विपुल सिंह ने जांच का आश्वासन दिया है।

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