इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान आदेश में कहा है कि शिक्षा का अधिकार के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य नहीं किया जा सकता।
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए कोई अभिभावक यदि तकनीकी कारणों से ऑनलाइन फॉर्म भर पाने में असमर्थ है, तो उनका ऑफलाइन आवेदन फार्म भी स्वीकार करना शिक्षा विभाग का कर्तव्य है।
हाईकोर्ट ने ऑनलाइन आवेदन को अनिवार्य नहीं माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने एक छात्र की याचिका पर सुनवाई के बाद एक आदेश में कहा है कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य नहीं किया जा सकता। यदि अभिभावक तकनीकी कारणों से ऑनलाइन फॉर्म नहीं भर पाते, तो उनका ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करना बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) का कर्तव्य है।
गरीब और वंचित परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ के समक्ष प्रयागराज के एक छात्र की तरफ से दायर एक याचिका में पिता/अभिभावक द्वारा यह सूचित किया गया था कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत दिया गया उसका मैनुअल आवेदन अधिकारियों ने ठुकरा दिया था। कोर्ट ने व्यापक सुनवाई के बाद इसे अनुच्छेद 21-ए और आरटीई की भावना के विपरीत बताया, क्योंकि इससे गरीब व कम शिक्षित परिवार वंचित हो सकते हैं। अदालत ने राज्य सरकार को ऐसे अभिभावकों के लिए एसओपी बनाने और बीएसए को एक सप्ताह में आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
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