ग्राम हल्का नंबर 10 सिर्री-पिपरिया में रिश्वतखोरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे राजस्व विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
कोरबा (छत्तीसगढ़)। प्रदेश सरकार जहां एक तरफ गांव-गांव में "सुशासन तिहार" मनाकर पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर कोरबा जिले के पोड़ी उपरोडा अनुभाग से सामने आई एक तस्वीर ने जमीनी हकीकत को बयां कर दिया है। तहसील पसान के ग्राम हल्का नंबर 10 सिर्री-पिपरिया में रिश्वतखोरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे राजस्व विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कड़ा एक्शन लिया है।
क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में हल्का नंबर 10 के पटवारी विनोद अग्रवाल खुलेआम पैसे लेते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके के ग्रामीणों और किसानों में भारी आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से "पैसा दो, तभी काम होगा" वाली व्यवस्था चल रही है। बिना मोटी रकम दिए राजस्व संबंधी फाइलें आगे नहीं बढ़तीं और किसानों को महीनों तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
गरीब आदिवासी किसानों से वसूली के आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार, कथित तौर पर वन पट्टा ऑनलाइन करने के नाम पर ₹5,000 की वसूली की जा रही थी। फौती नामांतरण के नाम पर ₹10,000 तक की रकम मांगी जा रही थी। सबसे गंभीर बात यह है कि इस कथित वसूली का शिकार क्षेत्र के गरीब आदिवासी किसान हो रहे हैं, जिन्हें अपने ही हक के सरकारी काम करवाने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई गंवानी पड़ रही थी। ग्रामीणों ने इसे बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि कुछ कर्मचारी गरीबों की मजबूरी को अपनी कमाई का जरिया बना चुके हैं, जिससे सरकार के 'सुशासन तिहार' जैसे अभियानों की साख पर बट्टा लग रहा है।
प्रशासन का त्वरित एक्शन, पटवारी तत्काल सस्पेंड
वीडियो के जरिए भ्रष्टाचार का मामला उजागर होते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम मनोज बंजारी ने बिना वक्त गंवाए त्वरित और सख्त कार्रवाई की है। एसडीएम ने वायरल वीडियो को संज्ञान में लेते हुए आरोपी पटवारी विनोद अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है।
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