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वैश्विक स्तर के चार - पांच बड़े सरकारी..

वैश्विक स्तर के चार - पांच बड़े सरकारी बैंक बनाने की योजना

MP News : केंद्र सरकार नये साल में देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एकीकरण की प्रक्रिया को तेज कर सकती है।

वैश्विक स्तर के चार - पांच बड़े सरकारी बैंक बनाने की योजना

वैश्विक स्तर के चार - पांच बड़े सरकारी बैंक बनाने की योजना |

MP News : केंद्र सरकार नये साल में देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एकीकरण की प्रक्रिया को तेज कर सकती है। इसका मकसद 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के तहत बड़े और विश्वस्तरीय बैंक बनाना है। सरकार देश में ऐसे बड़े और मजबूत बैंक की स्थापना करना चाहती है, जो वैश्विक स्तर पर अन्य देशों से प्रतिस्पर्धा कर सकें। इस एकीकरण को लेकर वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बीच विचार विमर्श शुरू हो चुकी है। 

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ दिनों पूर्व कहा था कि देश को कई मजबूत वैश्विक स्तर के बैंकों की जरूरत है और इस दिशा में काम पहले ही शुरू हो चुका है। इससे संकेत मिलते हैं कि अगले कुछ समय में बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस प्रक्रिया के तहत कुछ छोटे बैंकों को बड़े बैंकों में मिलाकर वैश्विक स्तर के चार-पांच बैंक बनाए जाने की योजना है। इससे घरेलू बैंकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। इस योजना के तहत बैंक ऑफ इंडिया (BOI), इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI), बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BoM), यूको बैंक (UCO) और पंजाब एंड सिंध बैंक (PSB) जैसे बैंकों के विलय की चर्चा है। उम्मीद है कि विलय की घोषणा अप्रैल 2026 तक हो सकती है।

मालूम हो कि इस समय देश में कुल 12 सरकारी बैंक हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) देश का सबसे बड़ा एकमात्र बैंक है जो परिसंपत्तियों के आधार पर वैश्विक शीर्ष 50 बैंकों में शामिल है। यह 43वें स्थान पर है। निजी क्षेत्र का एचडीएफसी बैंक 73वें स्थान पर है। केंद्र सरकार ने बड़े बैंकों के निर्माण के उद्देश्य से इससे पहले दो बार विलय प्रक्रिया शुरु की थी। अगस्त, 2019 में चार बड़े बैंकों के विलय की घोषणा की गई। इससे इनकी कुल संख्या 2017 के 27 से घटकर 12 हो गई है।

1 अप्रैल, 2020 से यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का पंजाब नेशनल बैंक में विलय किया गया था। सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में व इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय हुआ था जबकि आंध्र बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में विलय कर एक बैंक बनाया गया था। इससे पहले देना बैंक और विजया बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में शामिल किया गया था। इन कदमों का मकसद बैंकों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना था।

केन्द्र सरकार के प्रयासों से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वित्तीय स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक इन बैंकों का शुद्ध लाभ दो लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर को पार कर जाएगा। यह सुधार बेहतर प्रबंधन, कम एनपीए और मजबूत आर्थिक गतिविधियों का परिणाम माना जा रहा है। मौजूदा रुझान को देखते हुए सरकारी बैंकों का शुद्ध लाभ 2025-26 के अंत तक 2 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को पार करने की उम्मीद है। 2024-25 में यह रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये था। 2023-24 में 1.41 लाख करोड़ रुपये इन बैंकों ने कमाए थे।

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