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सिंहस्थ कुंभ को कार्बन क्रेडिट और जल-न्यूट्रल...

मध्य प्रदेश सरकार की योजना: सिंहस्थ कुंभ 2028 को कार्बन क्रेडिट और जल-न्यूट्रल बनाने की तैयारी

पूर्ण प्लास्टिक रीसाइक्लिंग से लेकर उपचारित जल के कृषि और उद्योग में पुन: उपयोग के साथ सभी प्रक्रिया वैश्विक मानकों के अनुरूप होगी।

मध्य प्रदेश सरकार की योजना सिंहस्थ कुंभ 2028 को कार्बन क्रेडिट और जल-न्यूट्रल बनाने की तैयारी

Preparations to make Simhastha Kumbh 2028 carbon credit and water-neutral |

इंदौर। उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ घाट, न्यूनतम कचरा, प्लास्टिक का पूर्ण पुनर्चक्रण, बेहतर नदी जल गुणवत्ता और अधिक सुरक्षित आध्यात्मिक अनुभव मिल सके, इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार एक ऐसी योजना विकसित कर रही है, जो कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के लिए संभवतः पहली सस्टेनेबिलिटी (सततता) योजना होगी।इसके साथ ही इस धार्मिक आयोजन को कार्बन क्रेडिट के लिए भी पात्र बनाने का लक्ष्य है।

30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की है संभावना

इस आयोजन में लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए बनाई जा रही प्रणालियों से उनकी यात्रा अधिक सुविधाजनक और स्वच्छ होगी।इन बदलावों के चलते श्रद्धालुओं को पिछले आयोजनों की तुलना में स्पष्ट अंतर दिखाई देगा। घाटों पर कचरा न्यूनतम होगा, प्लास्टिक बोतलों और पैकेजिंग का पूरी तरह पुनर्चक्रण किया जाएगा और अनुष्ठानिक स्नान के लिए क्षिप्रा नदी पहले से अधिक स्वच्छ होगी।

कार्बन अकाउंटिंग प्रस्ताव की समीक्षा शुरू

सिंहस्थ प्रशासन ने कार्बन अकाउंटिंग, प्लास्टिक रीसाइक्लिंग तकनीकों, वेस्ट-टू-रिसोर्स प्रणालियों और नदी शुद्धिकरण मॉडलों को लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के प्रस्तावों की समीक्षा शुरू कर दी है। सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा,“हमारा लक्ष्य मुख्यमंत्री की उस परिकल्पना को साकार करना है, जिसमें आधुनिक और युवा-केंद्रित सिंहस्थ हो, जहाँ श्रद्धालु और साधु-संत स्वच्छ, सुरक्षित और अधिक टिकाऊ वातावरण में आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करें। सरकार 2028 के आयोजन की मूल योजना में सततता को शामिल करना चाहती है। संभवतः पहली बार किसी कुंभ-स्तरीय आयोजन में यह दिखाया जाएगा कि पारंपरिक धार्मिक समागम वैज्ञानिक और टिकाऊ प्रणालियाँ कैसे अपना सकते हैं। पूर्ण प्लास्टिक रीसाइक्लिंग से लेकर उपचारित जल के कृषि और उद्योग में पुन: उपयोग तक—हर प्रक्रिया वैश्विक मानकों के अनुरूप होगी।”

यह पहल इंदौर के उस अनुभव पर आधारित है, जहाँ नगर निगम स्तर पर बायो-मीथनेशन, बायो-सीएनजी और वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं के माध्यम से कार्बन क्रेडिट सफलतापूर्वक बेचे गए हैं।

पहली कार्बन क्रेडिट से हुई 50 लाख रुपये की आय

पहली कार्बन क्रेडिट रिपोर्ट में लगभग 1.7 लाख टन CO₂की बचत दर्ज की गई, जिससे करीब ₹50 लाख की आय हुई, जबकि बाद की रिपोर्टों में कुल मूल्य लगभग ₹8.34 करोड़ बताया गया। आशीष सिंह ने स्वीकार किया कि 30 करोड़ लोगों की संभावित उपस्थिति को देखते हुए, श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ अनुभव सुनिश्चित करने में कचरा प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। समीक्षा के तहत प्रस्तावों में बोतलों, मल्टी-लेयर पैकेजिंग और आसपास के गाँवों से आने वाले कचरे के पृथक्करण और पुन: उपयोग सहित 100% प्लास्टिक रीसाइक्लिंग समाधान शामिल हैं। कई कंपनियों ने आयोजन की कार्बन क्रेडिट पात्रता बढ़ाने के लिए विकेन्द्रीकृत ‘जीरो-वेस्ट’ मॉडल भी सुझाए हैं।

आयोजन को वॉटर न्यूट्रल बनाने के किये जाएगें उपाय

दिल्ली स्थित एक थिंक-टैंक की कार्यकारी मीशा टंडन ने बताया कि ये उपाय श्रद्धालुओं के लिए कैसे लाभकारी होंगे। उन्होंने कहा, “हमने मध्य प्रदेश सरकार को कार्बन क्रेडिट अर्जित करने और आयोजन को वॉटर-न्यूट्रल बनाने के उपाय प्रस्तुत किए हैं। कार्बन उत्सर्जन के लिहाज से सबसे संवेदनशील क्षेत्र—इन्फ्रास्ट्रक्चर, कचरा, परिवहन और ऊर्जा—हैं। इन क्षेत्रों से उत्सर्जन घटाने और उस पर क्रेडिट अर्जित करने के लिए हमने ठोस कदम तैयार किए हैं।”

क्षिप्रा नदी के पुनर्जीवन के लिए एजेंसियों ने पेश की विस्तृत योजना

अन्य एजेंसियों ने क्षिप्रा नदी के पुनर्जीवन के लिए विस्तृत योजनाएँ पेश की हैं, जिनमें जियो-टैगिंग, जल प्रवाह को प्रभावित करने वाली संरचनाओं का मानचित्रण, भूमिगत रिसाव का अध्ययन और वैज्ञानिक शुद्धिकरण व जल प्रबंधन के लिए दस्तावेज़ीकरण शामिल है। नदी के स्वच्छ होने से अनुष्ठानिक स्नान करने वाले श्रद्धालुओं का अनुभव सीधे तौर पर बेहतर होगा। अधिकारियों ने बताया कि इन प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जाएगा और 2028 से पहले चरणबद्ध तरीके से उपयुक्त घटकों को लागू किया जाएगा।

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