भोपाल। मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करने वाले निजी अस्पतालों पर सरकार ने शिकंजा...
भोपाल। मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज करने वाले निजी अस्पतालों पर सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ताजा निर्देशों के अनुसार, प्रदेश के लगभग 70 निजी अस्पताल इस योजना के पैनल से बाहर कर दिए जाएंगे।
इन अस्पतालों के पास प्रमाण पत्र नहीं
इस कार्रवाई की गाज मुख्य रूप से भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों के अस्पतालों पर गिरी है। इन अस्पतालों के पास NABH (नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) का 'इंट्री लेवल' प्रमाणपत्र (प्रमाण पत्र) नहीं है।
अंतिम तिथि पर प्रमाण पत्र जमा नहीं करेंगे तो बाहर
सरकार ने इन प्रमाणपत्रों को जमा करने के लिए 31 मार्च 2026 की आखिरी तारीख तय की है। यदि इस तिथि तक अस्पताल मानक पूरे नहीं करते हैं तो उन्हें योजना से आधिकारिक तौर पर बाहर कर दिया जाएगा।
आम जनता को इलाज के विकल्प कम होंगे
भोपाल-इंदौर जैसे शहरों के कई प्रतिष्ठित अस्पताल अब आयुष्मान कार्ड स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे मरीजों को सरकारी या अन्य प्रमाणित निजी अस्पतालों की ओर रुख करना होगा। सरकार का तर्क है कि इस अनिवार्य प्रमाणन (Accreditation) से अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और सुरक्षा के मानकों में सुधार होगा।
राष्ट्रीय मानक को पूरा करने वालों को भी प्रणाणपत्र
पिछले कुछ समय में योजना के दुरुपयोग और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद प्रशासन अब केवल उन्हीं अस्पतालों को अनुमति दे रहा है जो राष्ट्रीय मानकों को पूरा करते हैं। इन शहरों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज की योजना से पहले जांच लें कि वह अस्पताल 31 मार्च के बाद भी इस योजना में शामिल है या नहीं।
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