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योगी कैबिनेट की बैठक में 37 प्रस्तावों पर लगी मुहर, गोरखपुर में बनेगी सोलर सिटी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ कैबिनेट का किसानों के हित में बड़ा फ़ैसला लेते हुए गेहूँ...

योगी कैबिनेट की बैठक में 37 प्रस्तावों पर लगी मुहर गोरखपुर में बनेगी सोलर सिटी

योगी कैबिनेट की बैठक में 37 प्रस्तावों पर लगी मुहर, गोरखपुर में बनेगी सोलर सिटी |

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ कैबिनेट का किसानों के हित में बड़ा फ़ैसला लेते हुए गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 160 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाने का फैसला लिया है। गेहूं खरीद के लिए राज्य के पचहत्तर जिलों में साढ़े छह हज़ार क्रय केंद्र बनाए जाएँगे। यह निर्णय योगी कैबिनेट की आज हुई बैठक में लिया गया। 

योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में स्थित लोकभवन में हुई कैबिनेट की बैठक में 35 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसमें विकास, रोजगार, कृषि और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। सरकार ने इन फैसलों को प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने और आम जनता को सीधा लाभ पहुंचाने वाला बताया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक से पूर्व एआई को लेकर कहा कि नया उत्तर प्रदेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शक्ति को अपना रहा है। Puch AI के साथ ₹25,000 करोड़ का MoU राज्य में AI पार्क्स, बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर, AI कॉमन्स और एक AI यूनिवर्सिटी बनाएंगे। यह पहले शासन को मजबूत करेगी, सुधारों को बढ़ावा देगी और हमारे युवाओं के लिए भविष्य के लिए तैयार अवसर पैदा करेगी।

कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रेस वार्ता में कैबिनेट में लिये गये निर्णयोऔ की जानकारी दी। कैबिनेट बैठक में खाद्य एवं रसद विभाग से जुड़े अहम फैसले के तहत बताया गया कि इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 160 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। राज्य में गेहूं की खरीद 30 मार्च 2026 से 15 जून 2026 तक की जाएगी। इसके लिए सभी 75 जिलों में करीब 6500 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

योगी कैबिनेट द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार गेहूं खरीद की व्यवस्था आठ एजेंसियों के माध्यम से की जाएगी, जिनमें भारतीय खाद्य निगम, उत्तर प्रदेश मंडी परिषद, प्रांतीय सहकारी संघ, प्रादेशिक सहकारी संघ, उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम, राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ शामिल हैं. इन एजेंसियों के माध्यम से किसानों से गेहूं की खरीद की जाएगी।

सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों से सीधे खरीद कर उन्हें उचित मूल्य सुनिश्चित करना है। बोरे महंगे होने की स्थिति को देखते हुए सरकार ने किसानों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने का भी निर्णय लिया है। निवेश को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने 'प्लग एंड प्ले' मॉडल पर निजी डेवलपर्स के माध्यम से शेड युक्त बिजनेस पार्क विकसित करने की योजना को भी मंजूरी दी है।

कैबिनेट में ऊर्जा विभाग से जुड़े अहम फैसले के तहत घाटमपुर पावर प्लांट में 660 मेगावॉट की तीन यूनिट लगाने का प्रावधान था, इनमें से दो यूनिट शुरू हो चुकी हैं, जबकि तीसरी यूनिट जल्द शुरू होगी। इस प्लांट के लिए झारखंड के दुमका में पछवारा कोल माइन 2016 में आवंटित की गई थी, कोल माइन के विकास के लिए 2242.90 करोड़ की राशि को कैबिनेट की मंजूरी मिली है। घाटमपुर पावर प्लांट केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त उपक्रम है।

अयोध्या के बाद अब गोरखपुर को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मंत्रिपरिषद ने गोरखपुर के चिलुआताल में 20 मेगावॉट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने को मंजूरी दे दी है। राज्य में इससे पहले भी दो फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं- एक औरैया जिले में NTPC द्वारा 20 मेगावॉट क्षमता का और दूसरा खुर्जा में THDC द्वारा 11 मेगावॉट क्षमता का।

गोरखपुर में प्रस्तावित यह फ्लोटिंग सोलर प्लांट कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा स्थापित किया जाएगा। सरकार के इन फैसलों से जहां एक ओर पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ेगा।

प्रदेश के 17 नगर निगमों में पहले से ही स्मार्ट सिटी योजना चल रही है, लेकिन अब सरकार ने नगर पालिकाओं को भी आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का फैसला किया है। नवयुग नगर पालिका योजना के तहत 58 जिला मुख्यालय वाले शहरों को कवर किया जाएगा, जिनमें 55 नगर पालिका परिषद और 3 नगर पंचायतें शामिल हैं। इस योजना के लिए 145 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो अगले 5 वर्षों के लिए प्रभावी होगी।

शहरी विकास को ध्यान में रखते हुए नगर विकास विभाग के तहत ‘अमृत योजना’ (AMRUT) और ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ की परियोजनाओं को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। 1.50 लाख से अधिक जनसंख्या वाले 24 निकायों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन निकायों में बुनियादी सुविधाओं का विकास, डिजिटल मॉनिटरिंग, बेहतर जल निकासी (ड्रेनेज), प्राचीन धरोहरों का संरक्षण और 'वन डे गवर्नेंस सेंटर' (एक दिन में नागरिक सेवाएं देने वाले केंद्र) विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही वन डे गवर्नेंस सेंटर भी विकसित किए जाएंगे। थीम पार्क बनेंगे, डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित होगी।

कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रेस वार्ता में बताया कि सेवा क्षेत्र (Service Sector) में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 'निजी बिजनेस पार्क विकास योजना' को मंजूरी दी है। इस नीति के माध्यम से निजी क्षेत्र द्वारा बिजनेस पार्क विकसित किए जाएंगे, जिससे निवेशकों की लागत में कमी आएगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

इसके साथ ही, सम्भल में एक 'इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक सेंटर' की स्थापना को भी हरी झंडी दी गई है। औद्योगिक गलियारे को मजबूती देने के लिए ग्रेटर नोएडा के बुढ़ाकी में, जहाँ पूर्वी और पश्चिमी औद्योगिक गलियारे मिलते हैं, वहां 174.12 एकड़ जमीन पर 'मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क' विकसित किया जाएगा। इसके लिए जमीन नीलामी और टेंडर डॉक्यूमेंट को भी कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति दे दी है। इस पहल से ग्रेटर नोएडा आने वाले समय में देश के एक बड़े लॉजिस्टिक हब के रूप में उभरेगा।

छोटे उद्योगों के लिए भी पीपीपी मॉडल पर औद्योगिक शेड बनाए जाएंगे। डेवलपर को जमीन दी जाएगी, वह शेड तैयार करेगा और उसे किराए पर दिया जाएगा।

यह भी पड़ें : https://www.primenewsnetwork.in/business/markets-crash-amid-west-asia-tensions-and-oil-price-surge/151174

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