पुणे की अदालत ने नास्रापुर में 3 वर्षीय बच्ची से बलात्कार और हत्या के मामले में 65 वर्षीय भीमराव कांबले को ट्रिपल मौत की सजा सुनाई है।
पुणे: महाराष्ट्र के पुणे की एक अदालत ने नास्रापुर गांव में तीन वर्षीया मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी और हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने 65 वर्षीय आरोपी भीमराव कांबले को सभी अपराधों का दोषी पाते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इस फैसले का विशेष लोक अभियोजक और पुलिस प्रशासन ने स्वागत किया है।
65 की उम्र में वासना से ग्रस्त व्यक्ति पर दया नहीं
विशेष लोक अभियोजक अधिवक्ता अजय मिश्र ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि कोर्ट ने अपने 137 पृष्ठों के विस्तृत निर्णय में इस वारदात को एक बेहद क्रूर और सुनियोजित हत्या माना है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, ''जब कोई व्यक्ति 65 वर्ष की आयु में भी वासना से ग्रस्त हो, तो ऐसे व्यक्ति पर किसी भी प्रकार की दया नहीं दिखाई जा सकती।'' इसी आधार पर दोषी को फांसी की सजा मुकर्रर की गई।
POCSO और BNS के तहत मिली 'ट्रिपल' मौत की सजा
पुणे ग्रामीण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि 1 मई को हुई इस जघन्य वारदात के बाद पुलिस ने त्वरित जांच पूरी की। जनता को मामले की फास्ट-ट्रैक सुनवाई का आश्वासन दिया गया था, जिसे कानून के दायरे में पूरा किया गया। अदालत ने अपने फैसले में 'सामाजिक चेतना' शब्द का विशेष उल्लेख किया और दोषी को पॉक्सो एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता की तीन अलग-अलग धाराओं के तहत तीन मौत की सजाएं (ट्रिपल डेथ पेनल्टी) सुनाई हैं।
सुप्रीम कोर्ट के 12 ऐतिहासिक फैसलों का हवाला
अधिवक्ता अजय मिसर के अनुसार, अभियोजन पक्ष ने दोषी के लिए कानून के तहत अधिकतम संभव सजा (फांसी) की मांग की थी। अपनी दलीलों को पुख्ता करने के लिए अभियोजन पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के 12 ऐतिहासिक फैसलों का हवाला दिया था, जिनमें नाबालिगों के साथ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों के लिए मृत्युदंड की अनिवार्यता पर जोर दिया गया है। अदालत ने इन सभी दलीलों और सबूतों को संदेह से परे पाते हुए दोषी को सख्त सजा से दंडित किया।