रांची की बाल कल्याण समिति में लंबे समय से अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली होने से बच्चों की सुरक्षा, न्याय और पुनर्वास से जुड़े मामलों के निपटारे में देरी की चिंता बढ़ गई है।
Ranchi Child Welfare Committee Faces Staff Shortage, Delaying Child Protection Services |
रांची,(झारखंड)। में संकटग्रस्त और पीड़ित बच्चों को त्वरित न्याय व संरक्षण देने वाली सबसे महत्वपूर्ण संस्था, बाल कल्याण समिति (CWC), खुद बदहाली के दौर से गुजर रही है। राजधानी रांची सहित राज्य के कई पड़ोसी जिलों में पिछले लगभग दो वर्षों से सीडब्ल्यूसी (CWC) में अध्यक्ष और नियमित सदस्यों के पद खाली पड़े हैं।
रांची में 'अतिरिक्त प्रभार' के भरोसे व्यवस्था
नियमों के मुताबिक, बाल कल्याण समिति एक पांच सदस्यीय टीम होती है। लेकिन रांची में वर्तमान में सभी नियमित सीटें खाली हैं। व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए लोहरदगा जिले की सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष और एक सदस्य को रांची का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा रामगढ़ की एक सदस्य की भी रांची में सेवा ली जा रही है। प्रभार पर चल रहे ये अधिकारी सप्ताह में सिर्फ दो दिन ही रांची में बैठक कर पाते हैं। शेष दिनों में समिति का कामकाज पूरी तरह ठप रहता है, जिससे दूर-दराज से आने वाले पीड़ित बच्चों और उनके अभिभावकों को मायूस होकर लौटना पड़ता है।
पड़ोसी जिलों का भी बुरा हाल
सीडब्ल्यूसी में खाली पदों की यह समस्या केवल रांची तक सीमित नहीं है। राज्य के अन्य प्रमुख जिले जैसे खूंटी, रामगढ़ और हजारीबाग में भी समितियां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रही हैं। हर जगह सदस्यों की कमी के कारण पेंडिंग मामलों का अंबार लगा हुआ है।
इन गंभीर मामलों पर पड़ती है सीधी मार
सीडब्ल्यूसी एक अर्ध-न्यायिक संस्था है, जिसके पास Civil Court जैसी शक्तियां होती हैं। इसके तहत पॉक्सो और यौन शोषण के मामले, मानव तस्करी और बाल श्रम, घरेलू हिंसा, मारपीट और बाल विवाह, गुमशुदा, अनाथ बच्चों के पुनर्वास और सरकारी छात्रवृत्ति से जुड़े संवेदनशील मामलों की सुनवाई होती है।
रेस्क्यू ऑपरेशंस पर लगा ब्रेक
बाल अधिकार विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है, कि समिति में पदों के खाली होने का सीधा असर फील्ड में होने वाले रेस्क्यू अभियानों पर पड़ा है। पिछले दो सालों में ऐसे कई मौके आए जब प्रशासन को बच्चों को तुरंत रेस्क्यू करना था, लेकिन सीडब्ल्यूसी के समय पर हस्तक्षेप न कर पाने के कारण कानूनी प्रक्रियाएं लटक गईं। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक अध्यक्ष और सभी सदस्यों की स्थाई नियुक्ति नहीं होती, तब तक किशोर न्याय अधिनियम की मूल भावना को धरातल पर उतारना नामुमकिन है।
जानिए क्या है बाल कल्याण समिति (CWC) और इसके अधिकार?
सीडब्ल्यूसी का गठन किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत प्रत्येक जिले में किया जाना अनिवार्य है। इसमें एक अध्यक्ष और चार सदस्य होते हैं, जिनमें कम से कम एक महिला सदस्य का होना कानूनी रूप से जरूरी है। अनाथ, बेसहारा, शोषित या तस्करी से छुड़ाए गए बच्चों के संरक्षण, उनके पुनर्वास, गोद लेने, फोस्टर केयर या उन्हें वापस परिवार से मिलाने का अंतिम फैसला यही समिति लेती है। कानून के मुताबिक, किसी भी संकटग्रस्त या रेस्क्यू किए गए बच्चे को सुरक्षित निकालने के 24 घंटे के भीतर सीडब्ल्यूसी के सामने पेश करना अनिवार्य है, ताकि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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