दतिया/भोपाल। मध्य प्रदेश के दतिया जिले में इतिहास के पन्नों से एक अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर सामने आई है। 'ज्ञान भारतम मिशन' के...
दतिया के संग्रहालय से लक्ष्मीबाई की दुर्लभ पेंटिंग मिली; संरक्षण के लिए भेजी गई भोपाल |
दतिया/भोपाल। मध्य प्रदेश के दतिया जिले में इतिहास के पन्नों से एक अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर सामने आई है। 'ज्ञान भारतम मिशन' के तहत दतिया संग्रहालय के अभिलेखागार (Archives) में शोध के दौरान झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, जीवाजी राव और भवानी सिंह की दुर्लभ पेंटिंग्स प्राप्त हुई हैं। इन ऐतिहासिक चित्रों को अब विशेषज्ञ संरक्षण (Conservation) और डिजिटाइजेशन के लिए भोपाल भेजा गया है।
प्राकृतिक रंगों का किया गया प्रयोग
विशेषज्ञों की टीम के अनुसार, रानी लक्ष्मीबाई की यह पेंटिंग वर्ष 1853 की है, जिसे पूरी तरह से प्राकृतिक रंगों और सोने की स्याही (Gold dust) के बारीक काम से बनाया गया है। पुरातत्वविद् डॉ. वसीम खान के अनुसार, पेंटिंग में दिखाई देने वाली टोपी संभवतः उनके दत्तक पुत्र दामोदर राव की है। माना जा रहा है कि यह चित्र उनके गोद लेने के समारोह (Adoption Ceremony) से संबंधित हो सकता है।
वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जाएगा
इन दुर्लभ चित्रों की स्थिति को देखते हुए इन्हें वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित (Conserve) किया जाएगा और भविष्य के लिए इनका डिजिटाइजेशन भी किया जाएगा।
सबसे प्रमाणित व समकालीन चित्र होने की संभावना
पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि यह रानी लक्ष्मीबाई का अब तक का सबसे प्रामाणिक और समकालीन चित्र हो सकता है। दतिया संग्रहालय के डिप्टी डायरेक्टर पी.सी. महोबिया के अनुसार, ये पेंटिंग्स 1986 में दतिया के तत्कालीन महाराज किशन सिंह जू देव द्वारा दान की गई थीं, जो लंबे समय से संग्रहालय के अभिलेखागार में सुरक्षित थीं। इस खोज से 1857 की क्रांति और झांसी के इतिहास से जुड़े कई नए तथ्य सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल इन धरोहरों को भोपाल स्थित राज्य पुरातत्व संग्रहालय के विशेषज्ञों की देखरेख में रखा गया है।
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