डिंडौरी में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों को निशुल्क विशेषज्ञ उपचार के लिए जबलपुर भेजा गया।
डिंडौरी,(मध्य प्रदेश)। ग्रामीण अंचलों में रहने वाले ऐसे बच्चे, जो जन्मजात या गंभीर बीमारियों के कारण सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे थे, उनके लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) किसी वरदान से कम नहीं है। डिंडौरी जिले में इस योजना के माध्यम से लगातार बच्चों की पहचान कर उन्हें बेहतर उपचार के लिए विशेषज्ञ अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा है। इसी कड़ी में आज जिले के विभिन्न ग्रामों के आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों से चिन्हित बच्चों को उपचार के लिए जबलपुर रवाना किया गया।
सर्जरी और आवश्यक उपचार पूरी तरह निशुल्क
कार्यक्रम के तहत कटे होंठ एवं तालु (क्लेफ्ट लिप एवं क्लेफ्ट पैलेट), जन्मजात हृदय रोग, सेरेब्रल पाल्सी (सीपी), मानसिक एवं शारीरिक विकास में विलंब सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों का चयन किया गया है। इन बच्चों को उनकी बीमारी के अनुसार विशेषज्ञ अस्पतालों में भर्ती कराया जाएगा, जहां जांच, सर्जरी और आवश्यक उपचार पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। उपचार पर होने वाला संपूर्ण खर्च केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जिससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक राहत मिल सके।
विकास संबंधी कमियों की समय रहते पहचान
सीएचसी विक्रमपुर में पदस्थ डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात दोष, बीमारियों, पोषण संबंधी समस्याओं और विकास संबंधी कमियों की समय रहते पहचान कर उनका उपचार सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि कटे होंठ-तालु वाले बच्चों को सर्जिकल उपचार के लिए तथा हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को विशेषज्ञ अस्पतालों में भेजा जा रहा है। वहीं सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों की मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जांच कर आगे की उपचार प्रक्रिया तय की जाएगी।
प्रत्येक टीम में एक पुरुष और एक महिला स्वास्थ्यकर्मी शामिल
कार्यक्रम से जुड़े डॉ. ऋषिकेश ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) भोपाल द्वारा प्रत्येक विकासखंड में एक मोबाइल हेल्थ टीम गठित की जाती है। प्रत्येक टीम में एक पुरुष और एक महिला स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहते हैं। यह टीम नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती है। यदि किसी बच्चे में हृदय रोग या अन्य गंभीर बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे आगे की जांच के लिए रेफर किया जाता है। उन्होंने बताया कि हृदय रोग की पुष्टि के लिए इको (Echocardiography) जांच कराई जाती है।
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