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RSS की संगठनात्मक संरचना में बड़ा बदलाव

आरएसएस के संगठनात्मक संरचना में होगा बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने संगठन को और प्रभावी बनाने और अधिक से अधिक लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव का फैसला लिया है।

आरएसएस के संगठनात्मक संरचना में होगा बड़ा बदलाव

RSS India Organization Structure |

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने संगठन को और प्रभावी बनाने और अधिक से अधिक लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव का फैसला लिया है। यह अहम बदलाव मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के संगठनात्मक ढांचे में किया गया है।

शताब्दी वर्ष से पहले बड़ा संगठनात्मक बदलाव

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने 100वें स्थापना वर्ष (2025-26) से पहले संगठनात्मक ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 'प्रांत' व्यवस्था को खत्म कर 'राज्य' आधारित संरचना लागू करने का फैसला लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत, प्रांत प्रचारकों की जगह 'संभाग प्रचारक' नियुक्त किए जाएंगे और क्षेत्र प्रचारकों की संख्या 11 से घटाकर 9 की जा रही है, जिसका उद्देश्य संगठन का विकेंद्रीकरण, जमीनी स्तर पर मजबूती और 100 वर्ष पूरे होने पर हर गाँव-बस्ती तक पहुँच बढ़ाना है।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड मिलकर बनेंगे उत्तर क्षेत्र

संघ ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को मिलाकर उत्तर क्षेत्र बनाने का फैसला किया है। हालांकि इसकी अधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। नई संरचना में उत्तर प्रदेश से जुड़े अहम बदलाव किए गए हैं। यह बदलाव विधानसभा चुनाव के बाद अगले साल मार्च से लागू किए जाएंगे। यह क्षेत्र संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि दोनों राज्यों में संघ की शाखाओं और कार्यकर्ताओं की संख्या काफी अधिक है।

प्रांत की जगह राज्य होगा मुख्य इकाई

नये संगठनात्मक संरचना के अनुसार अब प्रांत के बजाय राज्य को मुख्य इकाई बनाया जा रहा है। इसके तहत एक राज्य, एक मुख्य प्रचारक' का प्रावधान होगा। 'प्रांत प्रचारक' की जगह 'संभाग प्रचारक' का पद बनाया गया है, जो कमिश्नरी स्तर पर काम करेंगे। कार्यक्षेत्र का विकेंद्रीकरण कर जिला, तहसील, ब्लॉक और गाँव स्तर पर कार्यकर्ताओं को अधिक अधिकार दिए जाएंगे ताकि ज़मीनी पकड़ मजबूत हो सके। इन बदलावों पर मार्च 2026 में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में मुहर लगने की संभावना है और ये 2027 से पूरी तरह ज़मीनी स्तर पर लागू होंगे।

पानीपत की बैठक में तैयार हुआ बदलाव का खाका

पानीपत (हरियाणा) के समालखा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के अंतिम दिन रविवार को संघ ने संगठनात्मक बदलाव के खाके को अंतिम रूप दिया गया। यह पुनर्गठन संघ की 100 वर्षों की यात्रा के मील के पत्थर को और अधिक प्रभावी बनाने और बदलते समय के अनुसार संगठन को गतिशील बनाए रखने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल यह तय किया गया है कि संघ के शताब्दी वर्ष के कारण नई तैनातियां नहीं की जाएंगी, लेकिन भविष्य में नई संरचना के आधार पर संगठन का काम आगे बढ़ेगा।

देश को 9 क्षेत्रों और 85 संभागों में बांटने की योजना

इस नई व्यवस्था में देश को 9 क्षेत्रों और 85 संभागों में बांटने की योजना बनाई गई है। क्षेत्र स्तर पर संगठन के समन्वय और विस्तार पर ध्यान दिया जाएगा, जबकि संभाग स्थानीय शाखाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन का जिम्मा संभालेंगे।

नई नियुक्तियां अभी नहीं होंगी

शताब्दी वर्ष के कारण अभी संगठन में पदाधिकारियों की नई नियुक्तियां नहीं की जाएंगी। हालांकि, तैयार किए गए इस नए ढांचे को आगे चलकर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। संघ की इस नई संरचना को संगठन के विस्तार और कार्यकुशलता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में संघ की गतिविधियों को और प्रभावी बनाने के लिए यह बदलाव अहम माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में दस संभाग बनाए जाएंगे

सूत्रों के अनुसार, उत्तर क्षेत्र में दो अलग-अलग इकाइयां होंगी, जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन करेंगी। इससे दोनों राज्यों में संघ के कार्यों का समन्वय और विस्तार अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा। नई व्यवस्था के तहत संघ का काम प्रांत के बजाय अब मुख्य रूप से क्षेत्र और संभाग स्तर से संचालित होगा। यूपी में कुल दस संभाग होंगे। जिसमें मेरठ, ब्रज, बरेली, लखनऊ, कानपुर, झांसी, प्रयागराज, अयोध्या, काशी और गोरखपुर शामिल हैं। यानी आने वाले समय में प्रांत की वर्तमान संरचना को समाप्त कर दिया जाएगा और संगठन का फोकस क्षेत्र व संभाग इकाइयों पर रहेगा।

संगठन के काम को मिलेगी मजबूती

संघ के सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश संघ के लिए हमेशा से ही प्रमुख कार्यक्षेत्र रहा है। शाखाओं, प्रशिक्षण वर्गों और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के लिहाज से यह राज्य संघ की गतिविधियों का बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में उत्तराखंड के साथ मिलाकर उत्तर क्षेत्र बनाए जाने से संगठन के काम को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पश्चिमी यूपी में नई जिम्मेदारियां तय

सूत्रों के मुताबिक ब्रज क्षेत्र के पूर्व प्रांत प्रचारक और मौजूदा समय में सह क्षेत्र संपर्क प्रमुख हरीश रौतेला को पश्चिमी यूपी में संघ के क्षेत्र संपर्क प्रमुख बनाने का फैसला किया गया है। इसके अलावा मनोज मिखरा को क्षेत्रीय संगठन मंत्री पश्चिमी यूपी बनाए जाने पर सहमति बनी है। हालांकि इसकी अधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।

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