पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने पिता की डायरी के बड़े राज खोले। जानिए पीएम मोदी संग उनके रिश्ते और RSS दौरे पर प्रणब दा के क्या विचार थे।
गुरुग्राम (हरियाणा): पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और लेखिका शर्मिष्ठा मुखर्जी ने शनिवार को अपने पिता की डायरियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों से जुड़ी कई अनसुनी बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि दिवंगत प्रणब मुखर्जी ने अपनी डायरी में लिखा था कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बाद नरेंद्र मोदी ही एकमात्र ऐसे नेता हैं जो देश की जनता की नब्ज़ को इतनी गहराई से समझ सकते हैं।
'जम्मू-कश्मीर बाढ़ और सियाचिन दौरे का था ज़िक्र'
शर्मिष्ठा मुखर्जी के अनुसार, उनके पिता ने यह बात जम्मू-कश्मीर में आई भीषण बाढ़ और पीएम मोदी द्वारा सियाचिन व कश्मीर के लोगों के साथ दिवाली मनाने के संदर्भ में लिखी थी। इसके साथ ही, प्रणब मुखर्जी प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की बारीकियों को बहुत तेज़ी से सीखने और समझने की क्षमता के भी बड़े प्रशंसक थे।
RSS मुख्यालय यात्रा पर प्रणब दा की खरी-खरी
साल 2018 में प्रणब मुखर्जी की नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) मुख्यालय की यात्रा पर हुए विवाद को याद करते हुए शर्मिष्ठा ने कहा, 'उस समय मैं कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय थी और पिता के इस फैसले से बहुत नाराज़ थी। जब मैंने उनसे कहा कि आप वहां जाकर RSS को वैधता दे रहे हैं, तो वे भड़क गए।' उन्होंने कहा, 'मैं कौन होता हूं RSS को वैधता देने वाला? यह भारत की जनता है, जिसने उनके एक प्रचारक को पूर्ण बहुमत के साथ प्रधानमंत्री चुनकर RSS को वैधता दी है। अगर कांग्रेस इसे अनदेखा करती है, तो यह उसका अपना नुकसान होगा।'
मुख्यमंत्री बनने से पहले से थे मधुर संबंध
शर्मिष्ठा ने बताया कि पीएम मोदी और उनके पिता के बीच संबंध मोदी जी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पहले के थे। जब नरेंद्र मोदी एक साधारण संघ कार्यकर्ता के रूप में दिल्ली आते थे, तब भी सुबह की सैर के दौरान दोनों की मुलाकात होती थी। उन्होंने डायरी का हवाला देते हुए बताया कि एक बार जब मोदी जी मुख्यमंत्री के रूप में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिले, तो प्रणब दा ने लिखा था, 'मोदी जी कांग्रेस और यूपीए सरकार के सबसे मुखर आलोचक रहे हैं, लेकिन जब भी वे मुझसे निजी तौर पर मिलते हैं, तो हमेशा मेरे पैर छूते हैं और कहते हैं कि ऐसा करने से उन्हें खुशी मिलती है।'
लोकतंत्र के लिए संवाद और संसद जरूरी
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि उनके पिता को हमेशा आम सहमति बनाने वाले नेता के रूप में जाना जाता था। उनके संबंध CPI, CPIM से लेकर BJP तक, सभी दलों के साथ सौहार्दपूर्ण थे। प्रणब मुखर्जी का मानना था कि विपक्ष को संसद बाधित नहीं करनी चाहिए। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय सोनिया गांधी को भी यही सलाह दी थी कि चर्चा और बहस कभी नहीं रुकनी चाहिए।