कोलकाता। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दक्षिण चौबी परगना जिले के डायमंड हार्बर में राज्य स्तर से लेकर जिला व थाने स्तर तक...
शुभेंदु अधिकारी बोले - पिछली सरकार ने पूरे सिस्टम को बिगाड़ रखा है, उसे ठीक किया जाएगा |
कोलकाता। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दक्षिण चौबी परगना जिले के डायमंड हार्बर में राज्य स्तर से लेकर जिला व थाने स्तर तक के पुलिस अधिकारियों की बैठक के बाद कहा कि अब कानून का शासन चलेगा, शासन का कानून नहीं। पिछली सरकार ने पूरे सिस्टम को बिगाड़ रखा है। उसे पूरी तरह से ठीक किया जाएगा। राज्य में बीएनएस लागू हो गया है, जिसने भी अत्याचार और भ्रष्टाचार किया है, उसके खिलाफ सख्ती से कार्रवाई होगी।
पुलिस वेलफेयर बोर्ड को अब खत्म कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों धमकाने और काम ठप्प कर देने वाली पुलिस की अनुशासनहीन व उग्र यूनियन रही रहेगी। गैरकानूनी तरीके से किसी से भी कोई भी वसूली नहीं कर पाएगा। इसकी शिकायत मिलने पर पुलिस तुरंत कार्रवाई करोगी। मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी के दक्षिण चौबीस परगना का पहला जिला दौरा और डायमंड हार्बर में राज्य स्तर पर पहली पुलिस अधिकारियों की बैठक थी। बैठक में मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, डीआईजी समेत दक्षिण चौबीस परगना के अधिकारी थे। दूसरे जिले के तमाम अधिकारी वर्चुअल के माध्यम से बैठक से जड़े थे।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि 2021 के विधानसभा चुनाव के पहले या बाद में धमकी देने, अत्याचार और हिंसा करने की घटनाओं मे जिन लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज है, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। जिनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई, अब भी उनकी शिकायत दर्ज और कार्रवाई होगी। शिकायतों को चार श्रेणी में रखा गया है। एक, राजनीतिक घटनाएं, दूसरा, पुलिस की ओर से थाने मे की अत्याचार की घटनाएं, तीसरा महिलाओं पर की गई अत्याचार की घटनाएं और केंद्र व राज्य की योजनाओं में लिए गए घूस की घटनाएं है। पेटीएम के मार्फत या बैंक एकाउंट में ट्रांसफर की गई राशि को भी प्रमाण को रूप में ग्रहण किया जाएगा।
पुलिस वेलफेयर बोर्ड को खत्म कर दिया गया है : CM शुभेंदु अधिकारी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि झूठी शिकायतें होने पर शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई होगी। पुलिस वेलफेटर बोर्ड को खत्म कर दिया गया है। पिछली सरकार के समय इसका राजनीतिकरण हो गया था, लेकिन पुलिस के कल्याण के लिए विकल्प तैयार किया जाएगा। सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों की सलाह ली जाएगी। मुख्य सचिव के नेतृत्व में एक कमिटी गठित की जाएगी और उस कमेटी की अनुशंसा के मुताबिक कदम उठाया जाएगा। तीन महीने में विकल्प तैयार कर लिया जाएगा।
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