पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सांसद अनंत महाराज को लेकर भाजपा छोड़ टीएमसी में चले जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सांसद अनंत महाराज को लेकर भाजपा छोड़ टीएमसी में चले जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री ममता टीएमसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से अंतरराष्ट्रीय भाषा दिवस के मौके आयोजित सरकारी समारोह में उन्हें बंगविभूषण से सम्मानित करने पर वे विवाद में घिर गए हैं। समारोह से जाते वक्त केंद्र सरकार पर उत्तर बंगाल के राजबंशी समाज के लिए कुछ नहीं करने का उनके आरोप से भी विवाद गहरा गया है।
अनंत महाराज के बयान और उपस्थिति से भाजपा असहज
भाजपा नेता और राज्यसभा के सदस्य नगेंद्र राय यानी अनंत महाराज कूचबिहार के राजबंशी समाज के प्रमुख नेता माने जाते हैं। वे कूचबिहार जिले के नहीं, पूरे उत्तर बंग के राजबंशी व कोच समाज की समस्याओं को लेकर मुखर रहे हैं। वे मौके-मौके पर केंद्र सरकार की भी आलोचना कर विवादस्पद बनते रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यक्रम में उनके आने, सम्मानित होने और पत्रकारों से बातचीत में केंद्र सरकार की आलोचना करने पर फिर विवादास्पद हो गए। उत्तर बंग के कर्सिंयांग के भाजपा विधायक विष्णु प्रसाद शर्मा 19 परवरी को टीएमसी का झंडा थाम चुके है। विष्णु प्रसाद शर्मा के बाद भाजपा सांसद अनंत महाराज के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ हो लेने की अटकले शुरू हो गई हैं।
केंद्र से मांगा हिसाब, मुख्यमंत्री ममता की जमकर की तारीफ
उन्होंने पत्रकारों से संक्षिप्त बाचचीत में ही यह सवाल खड़ा कर दिया कि केंद्र सरकार ने राजबंशियों के लिए क्या कुछ किया है। कूचबिहार अलग राज्य था। 1947 में भारत में शामिल हुआ। राजवंशी व कोच लोगों को क्या मिला। समारोह में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा सांसद अनंत महाराज की काफी प्रशंसा की। अनंत महाराज ने भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रशंसा करने में कमी नहीं की। उन्होंने ममता बनर्जी आभार जताते हुए राजबंशी समुदाय के अग्रणी नेता रहे चिला राय की लिखी एक कविता का पाठ भी किया।
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