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BPSC में हासिल की 1340वीं रैंक

कपड़ा सिलाई करने वाले की बेटी बनी जिला श्रम कल्याण पदाधिकारी

BPSC में 1340वीं रैंक हासिल कर शगुफ्ता फिरदौस ने जिले का मान बढ़ाया है।

कपड़ा सिलाई करने वाले की बेटी बनी जिला श्रम कल्याण पदाधिकारी

Tailor’s Daughter Becomes District Labour Welfare Officer |

मोतिहारी (बिहार): जिले के हरसिद्धि प्रखंड अंतर्गत मुरारपुर पंचायत के औरैया गांव की बेटी शगुफ्ता फिरदौस ने अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष के दम पर बड़ी सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। प्रतियोगी परीक्षा BPSC में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने 1340वां रैंक प्राप्त किया और जिला श्रम कल्याण पदाधिकारी (Labour Welfare Officer) के पद पर चयनित होकर परिवार एवं क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। 

पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल

शगुफ्ता की इस उपलब्धि से पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों तथा शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। शगुफ्ता के पिता सेराजुल हक अंसारी काठमांडू (नेपाल) में कपड़ा सिलाई का कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। 

शगुफ्ता के जीवन मे सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियां

सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद पिता अंसारी ने अपनी बेटियों की शिक्षा में कभी कोई कमी नहीं आने दी। उन्होंने बताया कि उनकी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी शगुफ्ता ने कड़ी मेहनत और समर्पण के बल पर जिला श्रम कल्याण पदाधिकारी बनने का सपना साकार किया है, जबकि उनकी दूसरी बेटी ने हाल ही में नीट (NEET) की परीक्षा दी है, जिसके परिणाम का परिवार को बेसब्री से इंतजार है। सेराजुल हक अंसारी ने कहा कि बेटियों की सफलता उनके अथक परिश्रम, अनुशासन और परिवार के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद परिवार ने हमेशा शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और आज उसी का सुखद परिणाम देखने को मिल रहा है। 

क्षेत्र के अन्य छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा का स्रोत

ग्रामीणों का कहना है कि औरैया गांव की बेटी की यह उपलब्धि क्षेत्र के अन्य छात्र-छात्राओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। शगुफ्ता फिरदौस ने यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे पाने का दृढ़ संकल्प हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। शगुफ्ता फिरदौस की सफलता ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे पूर्वी चंपारण जिले का मान बढ़ाया है। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा और मेहनत के प्रति प्रेरित करती रहेगी। 

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