सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर संबंधित मामले में सुनवाई में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी बात रखी। ऐसा पहली बार हुआ। चुनाव आयोग ने भी अपना बचाव किया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के विरोध में रखी अपनी बात
सुप्रीम कोर्ट में नई नजीर
कोलकाता।
सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर संबंधित मामले में सुनवाई में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी बात रखी। ऐसा पहली बार हुआ। चुनाव आयोग ने भी अपना बचाव किया। सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई 9 फरवरी को करेगा। सुप्रीम कोर्ट एसआईआर संबंधित मामला करने वाले टीएमसी व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और चुनाव आयोग को नोटिस देगा। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 10 फरवरी के पहले राज्य सरकार के क्लास टू अफिसरों के नामों की सूची देने को कहा जिन्हें वोटरों की सुनवाई में नियुक्त किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को बदले स्थान और सरनेम जैसी छोटी बातों पर नरम रूख अपनाने को कहा।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर संबंधित मामले को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ याचिका दायर की थी जिस पर सुनवाई हुई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट से न्याय करने का अनुरोध हुए कहा कि चुनाव आयोग एसआईआर के नाम पर पश्चिम बंगाल के साथ अन्याय कर रहा है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि एसआईआर की वजह से 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। बीएलओ की मौत हुई है। चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन नहीं कर रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ह्वाटसएप से काम करने का आरोप लगाते हुए ह्वाटसएप कहा। मुख्यमंत्री ने यह मुद्दा भी उठाया कि असम में क्यों नहीं एसआईआर किया गया।
चुनाव आयोग पर विधानसभा चुनाव के ठीक पहले एसआईआर कराने, गलत आधार पर 2002 के वोटर लिस्ट से वोटरों का नाम मिलान करने नाम पर 58 लाख वोटरों का नाम हटाने, लाजिकल डिसक्रिपेंसी के नाम पर एक करोड़ 36 लाख वोटरों का नाम छांटने, बदले पते और सरनेम के नाम पर वोटरों का नाम काटने, वोटरों की सुनवाई में राज्य सरकार द्वारा जारी कागजातों की अमान्य करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईआरओ और एईआरओ को माना नहीं जा रहा है। कोई प्रावधान न रहते हुए दूसरे राज्यों, भाजपा शासित राज्यों से 8 हजार से भी ज्यादा रोल आबजर्बर और माइक्रो आबजर्वर नियुक्त किया गया है। रोल आबजर्बर और माइक्रो आबजर्बरों ईआरओ और एईआरओ की अनुशंसा को दरकिनार करते हुए वैध वोटरों का नाम हटा रहे हैं। मुख्यंत्री ने जानना चाहा कि केवल पश्चिम बंगाल में ही क्यों रोल आबजर्बर और माइक्रो आबजर्बर नियुक्त किए गए। उन्होंने यह भी जिक्र किया कि बिहार में पश्चिम बंदगार 43 जिले हैं लेकिन वहां आबजर्बर नियुक्त नहीं किए गए जबकि पश्चिम बंगाल में 23 जिले हैं और यहां अाबजर्बर नियुक्त किए गए। उन्होंने जिक्र किया कि नियम के विरुद्ध गैर सरकारी संस्थानों के अधिकारियों को आबजर्बर बनाया गया।
चुनाव आयोग की ओर से यह तर्क दिया गया कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने सहयोग नहीं किया इसलिए दूसरे राज्यों से और गैरसरकारी संस्थानों से अधिकारियों को रोल आबजर्बर और माइक्रो आबजर्बर नियुक्त किया गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस सच को नहीं बताया कि सरकार ने सहयोग नहीं किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव आयोग का पूरा सहयोग किया है इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री को क्लास टू अफिसरों की सूची देने के लिए कहा। चुनाव आयोग ने कहा कि वह रोल आबजर्बर और माइक्रो आबजर्बर की नियुक्त पर गौर करेगा।
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