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रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने मप्र, उप्र और...

रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने मप्र, उप्र और राजस्थान को लगाई कड़ी फटकार

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने चम्बल नदी क्षेत्र में जारी अवैध रेत खनन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है...

रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने मप्र उप्र और राजस्थान को लगाई कड़ी फटकार

रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने मप्र, उप्र और राजस्थान को लगाई कड़ी फटकार |

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट ने चम्बल नदी क्षेत्र में जारी अवैध रेत खनन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। दौरान न्यायालय ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को कड़ी फटकार लगाई।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी

​जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकारें अवैध खनन रोकने में विफल रहती हैं तो कोर्ट कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर अगले एक महीने में हालात नहीं सुधरे तो चम्बल अभयारण्य (Chambal Sanctuary) की सुरक्षा के लिए पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की जा सकती है।

​राज्य सरकार पर जुर्माना पर विचार

स्थिति गंभीर होने पर कोर्ट पूरे क्षेत्र में रेत खनन पर पूरी तरह से रोक लगाने और राज्य सरकारों पर भारी जुर्माना लगाने पर भी विचार कर सकता है। ​अदालत ने अवैध खनन माफियाओं पर नकेल कसने के लिए राज्यों को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं, जिसमें चम्बल नदी के किनारों और खनन के लिए इस्तेमाल होने वाले मुख्य रास्तों पर हाई-रिज़ॉल्यूशन CCTV कैमरे लगाने के आदेश दिए गए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मुरैना (MP) और धौलपुर (राजस्थान) में खनन से जुड़ी मशीनों और वाहनों में GPS लगाना अनिवार्य होगा।

​माफिया के खिलाफ कठोर कानून का प्रयोग करें

कोर्ट ने कहा कि खनन माफियाओं के खिलाफ 'निवारक निरोध' (Preventive Detention) और उनकी संपत्तियों को कुर्क करने जैसे सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि अवैध खनन से न केवल घड़ियाल जैसे लुप्तप्राय जीवों को खतरा है, बल्कि चम्बल के पुलों की नींव भी खोदी जा रही है, जिससे बड़े हादसे की आशंका है।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वसंज्ञान

​यह मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा खुद संज्ञान (Suo Motu) लेने के बाद शुरू हुआ। हाल ही में एक वन रक्षक की हत्या और चम्बल पुल के पास बड़े पैमाने पर खुदाई की तस्वीरों ने कोर्ट को झकझोर दिया था। कोर्ट ने अधिकारियों की निष्क्रियता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे प्रशासन 'आंखें बंद करके लेटा हुआ है'। अगली सुनवाई 11 मई 2026 को होनी तय हुई है, जिसमें तीनों राज्यों को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी होगी।

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