तकनीक सबकुछ नहीं है। यह जान बचाने की गारंटी भी नहीं है। हाल ही में कार हादसों में एयरबैग खुलने के बावजूद जान जाने की हालिया घटनाएं हुई हैं।
इंदौर। तकनीक सबकुछ नहीं है। यह जान बचाने की गारंटी भी नहीं है। हाल ही में कार हादसों में एयरबैग खुलने के बावजूद जान जाने की हालिया घटनाएं हुई हैं। इससे वाहन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल पैदा हो गया है। ऑटोमोबाइल सेफ्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि एयरबैग किसी भी दुर्घटना में जान बचने की गारंटी नहीं होते। वाहन की रफ्तार, स्ट्रक्चर और ड्राइविंग स्किल्स अहम भूमिका निभाते हैं।
एयरबैग खुले, पर नहीं बची जान
मध्यप्रदेश के इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में हाल ही में हुए दो सड़क हादसों में तेज रफ्तार कारों के एयरबैग खुले, लेकिन इसके बावजूद कार सवारों की मौके पर ही मौत हो गई। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि सिर्फ एयरबैग पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।
कई चीजें तय करते हैं हादसे का परिणाम
ऑटोमोबाइल सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हाई-स्पीड एक्सीडेंट, वाहन का कमजोर बॉडी स्ट्रक्चर, सीट बेल्ट का सही तरीके से उपयोग न करना और टक्कर का एंगल, सभी फैक्टर्स मिलकर हादसे के परिणाम तय करते हैं। कई मामलों में एयरबैग खुलने का समय और उसकी दिशा भी चोटों को कम करने में निर्णायक साबित नहीं हो पाती।
सीट बेलट अनिवार्य, रफ्तार से बचें
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें, तेज रफ्तार से बचें और वाहन चलाते समय ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करें। उनका कहना है कि एयरबैग केवल एक सहायक सुरक्षा उपकरण है, लेकिन सुरक्षित ड्राइविंग ही जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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