अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ समय में गिद्धों के संरक्षण के लिए किए गए विशेष प्रयासों और अनुकूल वातावरण के कारण उनके कुनबे में यह सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली है।
नर्मदापुरम। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद सुखद खबर आई है। जंगलों में पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित रखने वाले गिद्धों की संख्या में शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व समेत पूरे मध्य प्रदेश में हाल ही में आयोजित की गई तीन दिवसीय गिद्ध गणना का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। रविवार शाम को एसटीआर प्रबंधन द्वारा इसके आधिकारिक आंकड़े जारी किए गए।
इस बार आधुनिक तकनीक से हुई गिनती-
इस बार गिद्धों की यह गणना पारंपरिक तरीकों के बजाय पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित थी। वन विभाग की टीमों ने ऑनलाइन मोबाइल ऐप का उपयोग करके गिद्धों के सभी संभावित ठिकानों और आवास स्थलों पर जाकर उनकी लाइव मॉनिटरिंग की। ऐप के जरिए डेटा दर्ज होने से आंकड़ों में पारदर्शिता और सटीकता आई है।
तीन दिनों तक गिनती, सामने आए सटीक आंकड़े
एसटीआर में लगातार तीन दिनों तक चले इस विशेष गणना अभियान के दौरान कुल 315 गिद्ध दिखाई दिए हैं, जो इस क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ समय में गिद्धों के संरक्षण के लिए किए गए विशेष प्रयासों और अनुकूल वातावरण के कारण उनके कुनबे (आबादी) में यह सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली है।
पर्यावरण के लिए इसलिए अहम हैं गिद्ध
गिद्धों को प्रकृति का 'सफाई दूत' या 'नेचुरल स्क्रैवर' माना जाता है। ये जंगलों और आस-पास के क्षेत्रों में मृत पशुओं के शवों को खाकर पर्यावरण को साफ रखते हैं, जिससे हानिकारक बैक्टीरिया और संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोकने में मदद मिलती है। सतपुड़ा के जंगलों में इनका बढ़ता कुनबा यह दर्शाता है कि यहां का इकोसिस्टम बेहद स्वस्थ और सुरक्षित है।
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