मंडला में एक पुलिसकर्मी की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जान देने वाले आरक्षक सुनील सरयाम को कथित तौर पर ब्लैकमेल किया जा रहा था।
मंडला (मध्यप्रदेश)। मंडला में एक पुलिसकर्मी की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। बम्हनी बंजर थाना परिसर में फांसी लगाकर जान देने वाले आरक्षक सुनील सरयाम को कथित तौर पर ब्लैकमेल किया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में दो महिला संविदा स्टाफ नर्स और उनके एक भाई को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आपत्तिजनक फोटो और वीडियो के जरिए आरक्षक पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था और उससे पैसों की मांग की जा रही थी। मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर पुलिसकर्मी ने आत्मघाती कदम उठा लिया।
सुसाइड नोट से खुला मामला
बम्हनी बंजर थाना परिसर में हुई इस आत्महत्या ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। अब पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने मामले को नया मोड़ दे दिया है। मृतक आरक्षक सुनील सरयाम द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में कुछ लोगों द्वारा लगातार ब्लैकमेल किए जाने का जिक्र किया गया था। पुलिस की जांच में सामने आया कि कोविड काल के दौरान आरक्षक का संपर्क आरोपियों से हुआ था।
दो नर्स और एक भाई गिरफ्तार
इसके बाद कथित रूप से आपत्तिजनक फोटो और वीडियो के आधार पर उसे लंबे समय तक ब्लैकमेल किया जाता रहा। आरोप है कि समय के साथ पैसों की मांग बढ़ती गई और मानसिक दबाव इतना बढ़ गया कि आरक्षक ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए दो महिला संविदा स्टाफ नर्स और उनके भाई को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं, जिन्हें जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
ब्लैकमेलिंग के खिलाफ सख्त संदेश
यह मामला सिर्फ एक आत्महत्या का नहीं, बल्कि उस मानसिक प्रताड़ना का भी उदाहरण है जो ब्लैकमेलिंग के जरिए किसी व्यक्ति को अंदर तक तोड़ सकती है। किसी की निजी जिंदगी और सम्मान को हथियार बनाकर धन उगाही करना गंभीर अपराध है और कानून ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान करता है। फिलहाल तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर दिया गया है और पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है। इस कार्रवाई के जरिए पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ब्लैकमेलिंग और भय दिखाकर किसी का शोषण करने वालों के खिलाफ कानून का शिकंजा लगातार कसता रहेगा।
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