यह खबर मध्य प्रदेश के उस परिवार की है जिसने “बेटे की चाहत” की सोच को पीछे छोड़ बेटियों को गर्व और सम्मान माना।
भोपाल। यह खबर मध्य प्रदेश के उस परिवार की है जिसने “बेटे की चाहत” की सोच को पीछे छोड़ बेटियों को गर्व और सम्मान माना। ऐसे तीन परिवारों की प्रेरक खबरें, जहां बेटियां ही बेटियां हैं और संतुष्ट हैं। समाज में अक्सर बेटे की इच्छा को ज्यादा महत्व दिया जाता है, लेकिन इन परिवारों ने इस सोच को बदलने का उदाहरण पेश किया।
परिवार में हर जिम्मेदारी निभा सकती हैं बेटियां
इन घरों में बेटियों को अच्छी शिक्षा, खेल और करियर के अवसर दिए गए हैं। कई बेटियां पढ़ाई और खेल में आगे बढ़कर परिवार का नाम रोशन कर रही हैं। परिवार में बेटियां हर जिम्मेदारी निभा सकती हैं और माता-पिता का सहारा बनती हैं।
अलग-अलग शहरों में महंके आंगन
नर्मदापुरम के एक परिवार में तीन बेटियां हैं और पिता का कहना है कि उन्हें कभी बेटे की कमी महसूस नहीं हुई। देवास के एक परिवार ने अपनी चारों बेटियों को अपना सम्मान बताया है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए पूरा समर्थन दिया है। विदिशा के परिवार ने बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता दी और आज उनकी बेटियां करियर में सफल हो रही हैं।
समाज को संदेश
यह खबर समाज को यह संदेश देती है कि बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं होना चाहिए। सही अवसर मिलने पर बेटियां भी हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं और परिवार का नाम रोशन कर सकती हैं।
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