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इंदौर के जंगलों में बाघों की लौटती दहाड़

चोरल–महू क्षेत्र बन सकता है नया टाइगर कॉरिडोर, कई जगह मिले पंजों के निशान

इंदौर वनमंडल के घने जंगल इन दिनों बाघों और तेंदुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं। चोरल–महू क्षेत्र में जनवरी–फरवरी के दौरान बाघ की मौजूदगी के ठोस प्रमाण मिले हैं।

चोरल–महू क्षेत्र बन सकता है नया टाइगर कॉरिडोर कई जगह मिले पंजों के निशान

Tiger Movement Spotted in Choral–Mhow Forests Near Indore |

इंदौर। इंदौर वनमंडल के घने जंगल इन दिनों बाघों और तेंदुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं। चोरल–महू क्षेत्र में जनवरी–फरवरी के दौरान बाघ की मौजूदगी के ठोस प्रमाण मिले हैं। अलग-अलग स्थानों पर बाघ के पंजों के निशान देखे गए हैं, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि यह इलाका धीरे-धीरे नए टाइगर कॉरिडोर के रूप में विकसित हो रहा है।

पगमार्क से बाघ की आवाजाही की पुष्टि

वन विभाग के अनुसार, घना वन क्षेत्र, पर्याप्त जल स्रोत और शिकार प्राणियों की बढ़ती संख्या इस क्षेत्र को बड़े मांसाहारी वन्यजीवों के लिए अनुकूल बना रही है। हाल के दिनों में चोरल क्षेत्र में तेंदुओं के साथ-साथ बाघ की गतिविधियों के प्रमाण सामने आए हैं। कई जगहों पर मिले पगमार्क (पंजों के निशान) से विशेषज्ञों ने बाघ की आवाजाही की पुष्टि की है।

बन सकता है महत्वपूर्ण टाइगर कॉरिडोर

अधिकारियों का कहना है कि यह क्षेत्र आसपास के संरक्षित वन क्षेत्रों से जुड़ता है, जिससे वन्यजीवों की आवाजाही आसान हो रही है। यदि यह सिलसिला जारी रहा तो चोरल–महू का वन क्षेत्र आने वाले समय में महत्वपूर्ण टाइगर कॉरिडोर बन सकता है।

ग्रामीणों व पर्यटकों से सतर्क रहने की अपील

वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों और पर्यटकों से जंगल क्षेत्र में सतर्क रहने की अपील की है। साथ ही, गश्त बढ़ा दी गई है और निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप भी लगाए जा रहे हैं, ताकि बाघों की संख्या और गतिविधियों का सटीक आकलन किया जा सके।

जैव विविधता के साकारात्मक संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संरक्षण प्रयासों को इसी तरह मजबूती से जारी रखा गया, तो इंदौर वनमंडल में बाघों की स्थायी वापसी संभव है, जो क्षेत्र की जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत है।

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