पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होने के बाद टीएमसी सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उन सांसदों और नेताओं की खबर लेने लगी हैं, जिनके क्षेत्र में विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन हुआ है।
कोलकाता (पश्चिम बंगाल)। पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होने के बाद टीएमसी सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उन सांसदों और नेताओं की खबर लेने लगी हैं, जिनके क्षेत्र में विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन हुआ है। उन्होंने अपनी सबसे करीबी सांसद काकोली घोष दस्तीदार को भी नहीं छोड़ा। सांसद काकोली घोष दस्तीदार को लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से हटा दिया गया और उनकी जगह को सांसद कल्याण बनर्जी को सुपुर्द कर दिया गया। इस पर सांसद काकोली घोष दस्तीदार बिफर पड़ी हैं।
वफादारी के बावजूद पद जाने से नाराजगी
टीएमसी सूत्रों के अनुसार सांसद काकोली घोष दस्तीदार को इस बात का मलाल है कि उनकी वफादारी का पुरस्कार उनका पद छीन कर दिया जा रहा है। वे ममता बनर्जी के साथ 1984 से ही हैं और उन्होंने हर दुख-सुख में उनका साथ दिया है। वे खुल कर अभी किए गए फेरबदल का विरोध नही कर रही है लेकिन उनकी काफी नाराजगी है।
एक साल में फिर बदला टीएमसी का समीकरण
टीएमसी को 2024 को लोकसभा चुनाव में काफी सफलता मिली थी। लोकसभा की 42 सीटों में 29 सीटी पर उसकी जीत हुई थी। उस समय मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी थे और दल के नेता सुदीप बनर्जी थे। लेकिन एक साल बाद बड़ा फेरबदल किया गया। सांसद अभिषेक को दल का नेता बनाया गया और कल्याण बनर्जी से मुख्य सचेतक का पद लेकर काकोली घोष दस्तीदार को सौंप दिया गया। अब मुख्य सचेतक का पद उनसे लेकर फिर कल्याण मुखर्जी को दे दिया गया।
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