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Madhya Pradesh : 24 घंटे में दो बड़े फैसले पलटे

24 घंटे में दो बड़े फैसले पलटे, सिंहस्थ लैंड पुलिस कानून वापस, ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट रद्द

Madhya Pradesh : भोपाल। मोहन यादव सरकार ने दो बड़े फैसले वापस ले लिये हैं। इससे पहली बार है मोहन सरकार की ऐसी फजीहत हुई है। सिंहस्थ लैंड पूलिंग कानून को वापस ले लिया गया है..

24 घंटे में दो बड़े फैसले पलटे सिंहस्थ लैंड पुलिस कानून वापस ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट रद्द

24 घंटे में दो बड़े फैसले पलटे, सिंहस्थ लैंड पुलिस कानून वापस, ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट रद्द |

Madhya Pradesh : भोपाल। मोहन यादव सरकार ने दो बड़े फैसले वापस ले लिये हैं। इससे पहली बार है मोहन सरकार की ऐसी फजीहत हुई है। सिंहस्थ लैंड पूलिंग कानून को वापस ले लिया गया है। इस पर किसानों ने आतिशबाजी की। इसके साथ ही ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट को रद्द करने के बाद ओंकारेश्वर में भी लोगों ने जश्न मनाया। सरकार ने किसानों और आम लोगों के विरोध के बाद यह फैसला वापस लिया है। सरकार के फजीहत पर विशेषज्ञ करते हैं कि कोई योजना बनाने से पहले इसपर गहराई से मंथन और प्रभवित होने वाले लोगों ले मशविरा जरूरी है। 

इससे फजीहत से बचा जा सकता था। योजना को बनाने में जमीनी जुड़ाव जरूरी है। यदि चर्चा की गई होती तो ऐसी गलती नहीं होती। इस बीच, भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राधवेंद्र सिंह पटेल कहते है, फरवरी में सरकार लैड पुलिस का प्रस्ताव लेकर आई थी। किसानों से कोई बात नहीं की गई। सरकार कहती है कि वे किसानों के हित में है। इसके विरोध में मालवा की तहसीलों में ज्ञापन दिये गये, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। संगठन ने केंद्रीय नेताओं को पत्र लिखा औऱ विरोध जताया।

बाद में प्रशासन ने कहा - कोई निर्माण होता है

8 अगस्त को संगठन के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्रा ने सरकार को फिर पत्र लिखा। इसपर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। 16 दिसंबर को तीन हजार ट्रैक्टर ट्राली के साथ किसानों ने प्रदर्शन किया। तब भी सरकार ने बातचीत नहीं की। इसके बाद सरकार ने गजट नोटिफिकेशन कर दिया। इसमें सरकार ने मनमाने तरीके से जमीन के उपयोग का प्रावधान किया। 10 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों में विरोध हुआ। इसके बाद उज्जैन में 18 को घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन की रूपरेखा बनी। किसान उज्जैन में डटे रहे जबतक सरकार अपना फैसला वापस नहीं ले लेती।

17 नवंबर की सुबह तय तय हुआ कि मुख्यमंत्री ने भारतीय किसान संघ के दिल्ली दफ्तर में राष्ट्रीय पदाधिकारियों से बातचीत की। दोपहर में मुख्यमंत्री भोपाल लौटे। तब प्रदेश पदाधिकरियों के साथ बैठक में किसानों की बात मानने पर सहमति बनी। कहा गया, उन्हें भरोसे में लिये बिना उनकी जमीन नहीं ली जाएगी। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हरीश आंजना ने बताया कि सरकार मान गई है। अब 18 को आंदोलन नहीं होगा। किसानों ने आतिशबाजी कर जीत का जश्न मनाया। 

ओंकारेश्वर में ममलेश्वर प्रोजेक्ट में भी सरकार ने लोगों से बात किये बिना लोगों के विस्थापन की योजना बना डाली। 409 मकान दुकान आश्रम धर्मशाला मदिर गेस्ट हाउस को प्लान कागज पर तैयार किए गए, लेकिन उसके मालिक को भरोसे में नहीं लिया गया। संत समाज ने भी इसे लेकर नाराजगी जाहिर की। 16 व 17 को पूरा ममलेश्वर लोक बंद रखा गया। बाद में प्रशासन ने कहा- कोई निर्माण होता है तो संत समाज से बातचीत करने के बाद ही होगा। व्यापक विरोध को देखते हुए इस ममलेश्वर प्रोजेक्ट को भी निरस्त करना पड़ा। 

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