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केंद्रीय मंत्री शिवराज ने पीएम मोदी के व्यक्तित्व और कार्यशैली पर लिखी पुस्तक ; 'अपनापन'

भोपाल। ​केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और कार्यशैली पर...

केंद्रीय मंत्री शिवराज ने पीएम मोदी के व्यक्तित्व और कार्यशैली पर लिखी पुस्तक   अपनापन

केंद्रीय मंत्री शिवराज ने पीएम मोदी के व्यक्तित्व और कार्यशैली पर लिखी पुस्तक ; 'अपनापन' |

भोपाल। ​केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और कार्यशैली पर आधारित 'अपनापन' नामक पुस्तक लिखी है। 26 मई को दिल्ली में रिलीज होने वाली यह पुस्तक मोदी के साथ चौहान के 33 वर्षों के जुड़ाव को दर्शाती है और उनके नेतृत्व, अनुशासन, समर्पण और देश भर के गरीबों, किसानों, महिलाओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति उनकी चिंता को उजागर करती है।

​पुस्तक के साथ और बहुत कुछ

​चौहान ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि पुस्तक का विमोचन 26 मई को दिल्ली में होगा। अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि 'अपनापन' केवल एक पुस्तक नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ बिताए गए 33 वर्षों के उनके अनुभवों और अवलोकनों को शब्दों में पिरोने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि जहाँ दुनिया नरेंद्र मोदी को एक राजनीतिक नेता के रूप में देखती है, वहीं उन्हें उन्हें एक साधक, एक कर्मयोगी और एक असाधारण इंसान के रूप में करीब से देखने का अवसर मिला।

शिवराज ने प्रधानमंत्री नोदी के बारे में यह भी लिखा

शिवराज सिंह चौहान ने लिखा कि लोगों ने मोदी को सार्वजनिक मंचों से भाषण देते हुए देखा है, लेकिन उन्होंने उस व्यक्ति को भी देखा है, जो देर रात तक काम करना जारी रखता है और अगली सुबह राष्ट्र सेवा के प्रति उसी ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ वापस लौटता है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के मन में गरीबों, किसानों, माताओं, बहनों, बेटियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के कल्याण के लिए गहरी चिंता रहती है।

​एकता यात्रा की यादें

​चौहान ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में 1991 की 'एकता यात्रा' को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय कई लोगों ने इसे एक राजनीतिक यात्रा के रूप में देखा था, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इसे राष्ट्रीय चेतना के अभियान में बदल दिया। मोदी का मानना था कि तिरंगा न केवल श्रीनगर के लाल चौक तक पहुंचना चाहिए, बल्कि देश भर के युवाओं के दिलों तक भी पहुंचना चाहिए। ​उन्होंने आगे कहा कि उसी कालखंड के दौरान उन्हें पहली बार एहसास हुआ कि नेतृत्व केवल भाषणों से नहीं, बल्कि समर्पण, अनुशासन, त्याग और अपनेपन की भावना से उभरता है।

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