उत्तर प्रदेश में सम्पत्तियों की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बड़ा कदम उठाते हूए जमीनों के बैनामे की प्रकिया को और जटिल कर दिया है।
यूपी में अब खतौनी जांच के बाद ही होगी जमीन की रजिस्ट्री
बैनामा में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए योगी कैबिनेट कैबिनेट का बड़ा फैसला
योगी कैबिनेट की बैठक में 30 प्रस्तावों को मिली मंजूरी
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में सम्पत्तियों की रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बड़ा कदम उठाते हूए जमीनों के बैनामे की प्रकिया को और जटिल कर दिया है। यह निर्णय मंगलवार को हुई योगी कैबिनेट की बैठक में लिया गया। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कुल 31 प्रस्ताव आए जिनमें से 30 प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान कर दी गयी। प्रस्ताव संख्या 3 को होल्ड किया गया।
योगी सरकार ने जमीनों की रजिस्ट्री में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, वहीं ग्रामीण परिवहन और सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, रविंद्र जायसवाल, दयाशंकर सिंह ने अलग अलग विभागों के प्रस्तावों को मिली मंजूरी के बारे में बताया।
योगी केबिनेट की बैठक में प्रस्ताव को मिली मंजूरी के मुताबिक, अब प्रदेश में कोई भी संपत्ति बेचने से पहले विक्रेता के नाम और दस्तावेजों का मिलान खतौनी में किया जाएगा। अगर नाम सही है, तभी रिजस्ट्री होगी अन्यथा नहीं। नाम का मिलान ना होने पर मामले की जांच की जाएगी। यह फैसला रजिस्ट्री प्रक्रिया में फर्जीवाड़े को रोकने और पूरे सिस्टम को पारदर्शी बनाने के मकसद से लिया गया है।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि ग्राम परिवहन योजना स्वीकृत हुई है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कैबिनेट ने एक बड़ी सौगात दी है। प्रदेश में 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना' को हरी झंडी दे दी गई है। इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश के 12,200 दूर-दराज के गांवों तक सीधी बस सेवा पहुंचाई जाएगी। इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले छात्रों, किसानों और मरीजों को शहरों तक आने-जाने में भारी सुविधा होगी।
योगी कैबिनेट की बैठक में लिये गये निर्णय के मुताबिक ओला-उबेर को सेवाओं के लिए अब रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। दयाशंकर सिंह ने बताया कि ओला उबेर जैसी गाड़ियों पर नियंत्रण के लिए इन्हें भी अब परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसका आवेदन शुल्क 25000 रुपये रखा गया है। अगर कोई कंपनी आवेदन करती है तो उसे 5 लाख रुपए देना होगा। रिनीवल के लिए पांच हजार देना होगा। पांच साल में एक बार रिनीवल होगा। भारत सरकार ने पहले ही इस पर नियम बना चुकी है। उसी नियम को राज्य सरकार ने अपने यहां लागू करने की मंजूरी दे दी है।
कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों के लिए कार्मिक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए 'आचरण नियमावली' को और सख्त बनाया गया है। अब यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की किसी भी चल संपत्ति (जैसे वाहन, सोना या अन्य निवेश) का लेनदेन करता है, तो उसे इसकी अनिवार्य सूचना अपने संबंधित सक्षम प्राधिकारी को देनी होगी। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके अलावा छह माह के मूल वेतन से ज्यादा शेयर मार्केट में लगाने पर घोषणा करनी होगी।
योगी सरकार ने घर खरीदारों को राहत देते हुए आवास विभाग ने विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद के डिफॉल्टरों के लिए 'वन टाइम सेटलमेंट' (ओटीएस) योजना शुरू करने का फैसला लिया है। इसका सीधा लाभ प्रदेश के करीब 19 हजार डिफॉल्टरों को मिलेगा, जो ब्याज और जुर्माने के कारण अपने बकाये का भुगतान नहीं कर पा रहे थे। इसके अलावा, पीएम आवास योजना (शहरी) और मुख्यमंत्री विस्तारीकरण योजना के तहत आठ शहरों में 'अफोर्डेबल हाउसिंग' प्रोजेक्ट्स के लिए बजट को भी स्वीकृति दी गई है। इसमें तीन महीने का समय पैसा जमा करने के लिए दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद ने उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि इस निर्णय के तहत, उच्च शिक्षा के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को नकदरहित चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर उच्च शिक्षा के शिक्षकों को नकदरहित चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की घोषणा की थी। इस योजना में अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षक, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षक और राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षक शामिल होंगे। शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा।
इस योजना के अंतर्गत शिक्षकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी नकदरहित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रति शिक्षक 2479.70 रुपये का प्रीमियम व्यय होगा, जिससे 1,28,725 शिक्षक लाभान्वित होंगे। इस पर सरकार को लगभग 31 करोड़ 92 लाख 38 हजार रुपये प्रतिवर्ष का व्यय वहन करना पड़ेगा, जिसकी व्यवस्था उच्च शिक्षा विभाग के बजट से की जाएगी।
इस योजना का संचालन राज्य समग्र स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। योजना के तहत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक की नकदरहित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी, जिसकी दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार होंगी।
इस योजना के लाभार्थियों और उनके आश्रितों का विवरण उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रतिवर्ष 30 जून तक साचीज को उपलब्ध कराया जाएगा। जो व्यक्ति पहले से केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य स्वास्थ्य योजना से आच्छादित होंगे, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा।
कैबिनेट बैठक में पारित अन्य प्रमुख प्रस्ताव -
पीएम आवास योजना (शहरी) 2.0: किफायती आवास (AHP) और किफायती किराया आवास (ARH) घटकों के क्रियान्वयन हेतु नई नीति और दिशा-निर्देशों को मंजूरी मिली।
नये शहरों का विकास: मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर और मऊ में विकास हेतु धनराशि स्वीकृत की गई।
अयोध्या में स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स: अयोध्या के वशिष्ठ कुण्ड में स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स निर्माण हेतु नजूल भूमि नगर निगम अयोध्या को हस्तान्तरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
मेरठ में लॉजिस्टिक्स क्लस्टर: अटल इण्डस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत मेरठ में एक्सप्रेसवे के पास इण्टीग्रेटेड मैनुफैक्चरिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (IMLC) की स्थापना को मंजूरी मिली।
कानपुर ट्रान्सगंगा सिटी: कानपुर में ट्रान्सगंगा सिटी को शहर से जोड़ने के लिए गंगा नदी पर 04 लेन सेतु और पहुँचमार्ग निर्माण के प्रस्ताव को पास किया गया।
निवेश प्रोत्साहन: एफडीआई (FDI) और फॉर्च्यून 500 निवेश प्रोत्साहन नीति-2023 के तहत गठित इम्पवर्ड कमेटी की संस्तुतियों पर अनुमोदन प्रदान किया गया।
शिक्षकों को कैशलेस इलाज: उच्च शिक्षा विभाग के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों और राज्य विश्वविद्यालयों के नियमित व स्ववित्तपोषित शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का निर्णय लिया गया।
क्रिकेट एसोसिएशन व ग्रीनपार्क: उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को ग्रीनपार्क स्टेडियम देने संबंधी अनुबन्ध के शुल्क निर्धारण में संशोधन को मंजूरी मिली।
डेयरी प्लांट की स्थापना: बुन्देलखण्ड पैकेज के तहत बांदा में 20 हजार लीटर क्षमता के नए प्लांट और झांसी के प्लांट के विस्तारीकरण (30 हजार लीटर तक) के कार्यों को स्वीकृति दी गई।
खनन व ई-नीलामी: मुख्य खनिजों की ई-नीलामी हेतु एमएसटीसी लिमिटेड (नीलामी प्लेटफॉर्म) और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स (ट्रान्जेक्शन एडवाइजर) को नामित किया गया।
लखवार एवं रेणुकाजी परियोजना: उत्तराखंड की लखवार और हिमाचल की रेणुकाजी बांध परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश के शेयर की धनराशि (क्रमशः ₹356.07 करोड़ और ₹361.04 करोड़) के व्यय प्रस्ताव को मंजूरी मिली।
भिक्षावृत्ति प्रतिषेध: उत्तर प्रदेश भिक्षावृत्ति प्रतिषेध अधिनियम, 1975 की धारा 21 में संशोधन के प्रस्ताव को पास किया गया।
उपभोक्ता संरक्षण: उत्तर प्रदेश राज्य और जिला उपभोक्ता संरक्षण परिषद (प्रथम संशोधन) नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को मंजूरी दी गई।
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