उत्तर प्रदेश में राज्य कर विभाग जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया को और तेज और पारदर्शी बनाने के लिए स्वचालित प्रणाली लाने पर विचार कर रहा है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्य कर विभाग जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया को और तेज और पारदर्शी बनाने के लिए स्वचालित प्रणाली लाने पर विचार कर रहा है। इससे व्यापारियों का कार्यशील पूंजी (Working Capital) फंसे नहीं। साथ ही विभाग व्यापारियों के लिए एमनेस्टी योजना लाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यह कदम कर दाता व्यापारियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत साबित हो सकता है, जिससे न केवल व्यापारिक माहौल बेहतर होगा बल्कि कर अनुपालन में भी वृद्धि होगी।
उच्चस्तरीय बैठक में व्यापारियों की राहत पर चर्चा
उत्तर प्रदेश की प्रमुख सचिव राज्य कर कामिनी रतन चौहान की अध्यक्षता में व्यापारिक संगठनों और कर अधिवक्ता संघों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में राज्य सरकार द्वारा कर से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए किये जा रहे प्रयासों पर चर्चा की गयी। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य कर विभाग की ओर से व्यापारियों और उद्यमियों को राहत देने के लिए ऑटोमेटेड रिफंड प्रक्रिया और एमनेस्टी योजना लाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
अधिकारियों ने व्यापारियों से लगातार किया संवाद
बैठक में आयुक्त राज्य कर नितिन बंसल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि विभाग लगातार व्यापारियों से संवाद कर रहा है। इसी क्रम में हाल ही में प्रदेश के सभी जिलों में व्यापारी संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में व्यापारियों ने भाग लिया।
पुरानी देनदारियों पर ब्याज और जुर्माने में छूट का विचार
राज्य कर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार पुरानी कर देनदारियों और रिटर्न डिफॉल्टर्स को राहत देने के लिए ब्याज और जुर्माने में छूट देने की योजना पर विचार कर रही है। इससे व्यापारियों को अनजाने में हुई गलतियों को सुधारने का अवसर मिलेगा। कर अधिवक्ता संघों और व्यापारिक संगठनों के साथ संवाद के जरिए रिफंड, अपील और कर निर्धारण में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि 31 मार्च 2025 तक मूल कर का भुगतान कर के ब्याज और जुर्माने से मुक्ति पाने की योजना (एमनेस्टी) पर जोर दिया जा रहा है।
व्यापारिक संगठनों और कर अधिवक्ताओं ने दिए सुझाव
बैठक में आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल, भूपेन्द्र सिंह सोबती, रविन्द्र सिंह, भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के चेयरमैन सुधीर हलवासिया सहित कई प्रमुख व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष संतोष कुमार गुप्ता, सेल्स टैक्स बार एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष संजय मिश्रा आदि ने सुझाव रखे।
ऑटोमेटेड सिस्टम और एआई से रिफंड प्रक्रिया में सुधार
व्यापारिक संगठनों ने आईटीसी और ब्लॉक राशि के शीघ्र रिफंड के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग का सुझाव दिया। साथ ही कैपिटल गुड्स पर आईटीसी की सुविधा देने, कोटेड और नॉन-कोटेड पेपर, गारमेंट और हैंडीक्राफ्ट के कच्चे माल पर समान कर दर लागू करने की मांग रखी।
टेक्निकल त्रुटियों और नोटिस प्रक्रिया में सरलता की मांग
इसके अलावा तकनीकी त्रुटियों पर जुर्माना न लगाने, लेट रिटर्न पर दंड में राहत, टोल पर्ची से छूट, इनवर्टेड ड्यूटी रिफंड और नोटिस प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग भी उठाई गई। कर अधिवक्ता संघों ने पुराने कर बकायों पर ब्याज माफी और अपील से जुड़े मामलों के लिए लिमिटेशन एमनेस्टी योजना लागू करने की मांग की। प्रमुख सचिव और आयुक्त ने आश्वासन दिया कि जिन विषयों पर जीएसटी काउंसिल का निर्णय जरूरी है, उन्हें वहां भेजा जाएगा।
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