उत्तर प्रदेश सरकार ने केन्द्रीय बजट में करीब 1.30 लाख करोड़ रुपये के केंद्रीय सहयोग की मांग की है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार के समक्ष राज्य में चल रही विकास परियोजनाओं और अन्य खर्चों की लंबी चौड़ी फेहरिस्त रखते हुए केन्द्रीय बजट में करीब 1.30 लाख करोड़ रुपये के केंद्रीय सहयोग की मांग की है। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के जीएसटी राजस्व में आयी गिरावट को देखते हुए केंद्र से इस टैक्स में न्यायसंगत हिस्सेदारी की मांग की है।
विभिन्न परियोजनाओं के लिए केंद्र से 1.30 लाख करोड़ रुपये की मांग
उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने दिल्ली में हुई प्री-बजट बैठक में राज्य ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एम्स की स्थापना, बुंदेलखंड में आईआईटी खोलने और कई शहरों में मेट्रो विस्तार सहित स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरी विकास और जल संरक्षण से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं के लिए करीब 1.30 लाख करोड़ रुपये के केंद्रीय सहयोग की मांग की है।
विशाल आबादी और क्षेत्रफल को देखते हुए केंद्र के सहयोग की जरूरत
उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक में कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से प्रगति कर रहा है, लेकिन इसकी विशाल आबादी और क्षेत्रफल को देखते हुए केंद्र का सहयोग बेहद जरूरी है। बैठक में यूपी सरकार ने लखनऊ, कानपुर और आगरा में मेट्रो विस्तार के साथ-साथ नए शहरों में मेट्रो नेटवर्क विकसित करने के लिए कुल 32,075 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई। इसके अलावा 17 नगर निगमों को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने के लिए 1,005 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मांगी गई है।
राज्य में अब तक स्वीकृत हो चुकी हैं 40,955 परियोजनाएं
यूपी ने जल जीवन मिशन के तहत 33,300 करोड़ रुपये की मांग रखते हुए बताया कि राज्य में अब तक 40,955 परियोजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं, जिनकी कुल लागत 1,53,876 करोड़ रुपये है। इसके सापेक्ष केंद्र सरकार ने 71,221 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी तय की थी, लेकिन अब तक केवल 38,456 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं। वित्त मंत्री ने शेष करीब 33,300 करोड़ रुपये, शीघ्र जारी करने की मांग की, ताकि परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके। इसके अलावा 60,000 तालाबों के पुनर्जीवन और ग्रे-ब्लैक वॉटर के निस्तारण के लिए 6,000 करोड़ रुपये की जरूरत बताई गई। पीएमश्री योजना के तहत स्कूलों के उन्नयन के लिए 855 करोड़ रुपये की मांग भी केंद्र के सामने रखी गई।
राज्य को हो रहा राजस्व का नुकसान
यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बैठक में जीएसटी से जुड़े मुद्दे उठाते हुए कहा कि 16वें वित्त आयोग के बाद केंद्रीय करों के विभाज्य पूल में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 19.67 प्रतिशत से घटकर करीब 17.93 प्रतिशत रह गई है, जिससे राज्य को लगातार राजस्व नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि सीमित वन क्षेत्र होने के बावजूद उत्तर प्रदेश ने बड़े पैमाने पर पौधरोपण कर राष्ट्रीय हित में योगदान दिया है, इसलिए केंद्र से न्यायसंगत हिस्सेदारी की अपेक्षा है।
बैठक में उठाए गए जीएसटी से जुड़े मुद्दे
बैठक में जीएसटी से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। यूपी ने पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर कर संग्रह में भारी गिरावट का जिक्र करते हुए क्षमता आधारित या उत्पादन आधारित कर प्रणाली पर पुनर्विचार की मांग की। यूपी सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्रीय बजट में इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया गया, तो राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन और बुनियादी ढांचे का व्यापक विस्तार संभव होगा और 'उत्तम प्रदेश' के लक्ष्य को नई गति मिलेगी।
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