मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल कृषि व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से डिजिटल कृषि व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है। किसानों को सरकारी योजनाओं का पारदर्शी और त्वरित लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में चल रही फार्मर रजिस्ट्री अभियान ने अब बड़े स्तर पर परिणाम देना शुरू कर दिया है। यूपी के गाजियाबाद और रामपुर में 100 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री का कार्य पूर्ण हो गया है। प्रदेश सरकार की सक्रिय पहल के चलते अब तक 2.38 करोड़ से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य का 82.69 प्रतिशत है।
करीब 50 लाख किसानों का पंजीकरण बाकी
प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत 5 नवंबर 2024 से की गई थी। केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए 2,88,70,495 किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान प्रगति के अनुसार अब तक 2,38,72,418 किसानों का नामांकन किया जा चुका है, जबकि लगभग 49,98,007 किसानों का पंजीकरण अभी शेष है।
90 दिनों में लक्ष्य पूरा करने के लिए मिशन मोड में अभियान
योगी सरकार ने इस अभियान को मिशन मोड में संचालित करते हुए जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, कृषि विभाग और स्थानीय स्तर के कर्मचारियों को तेजी से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य किसानों का एकीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार करना है, जिससे उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, कृषि अनुदान, ऋण सुविधा और अन्य योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सके। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगले 90 दिनों यानी 26 सितंबर 2026 तक लक्ष्य पूरा करना है।
अंश निर्धारण का काम भी 87.53% तक पहुंचा
प्रदेश सरकार की प्राथमिकता केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि और किसानों के रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना भी है। इसी क्रम में “अंश निर्धारण” का कार्य भी तेजी से चल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अंश निर्धारण का कार्य 87.53 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इससे भूमि रिकॉर्ड की शुद्धता बढ़ेगी और भविष्य में विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।
कृषि व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद
विभागीय अधिकारियों के अनुसार फार्मर रजिस्ट्री उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे सरकार को वास्तविक किसानों की पहचान करने, योजनाओं की मॉनिटरिंग करने और कृषि आधारित नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। साथ ही किसानों को सरकारी सहायता प्राप्त करने में भी आसानी होगी।
डिजिटल गवर्नेंस से सशक्त होते अन्नदाता
योगी सरकार लगातार तकनीक आधारित प्रशासन को बढ़ावा दे रही है। डिजिटल गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और डेटा आधारित योजना क्रियान्वयन के जरिए उत्तर प्रदेश को आधुनिक और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। फार्मर रजिस्ट्री अभियान को भी इसी व्यापक परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश के करोड़ों किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
किसानों के लिए इसके क्या मायने हैं?
- योजनाओं का सीधा और त्वरित लाभ: फार्मर रजिस्ट्री होने से पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा और कृषि सब्सिडी जैसी सरकारी योजनाओं का पैसा बिना किसी बिचौलिए या देरी के सीधे किसानों के खातों में पहुंचेगा।
- जमीनी विवादों से मुक्ति: 'अंश निर्धारण' (भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण) का काम पूरा होने से जमीनी कागजातों में गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म होगी, जिससे भविष्य में होने वाले आपसी या कानूनी विवादों से राहत मिलेगी।
- आसान लोन और सरकारी मदद: एक ही जगह पर सारा डिजिटल डेटा होने के कारण किसानों को बैंक से खेती के लिए ऋण (KCC आदि) लेने और खाद-बीज पर मिलने वाले अनुदान का लाभ उठाने में कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी।
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