UP News : उत्तर प्रदेश में राजस्व लेखपाल भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में ओबीसी आरक्षण में विसंगति को लेकर सियासत तेज हो गई है।
लेखपाल भर्ती में ओबीसी आरक्षण पर यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने उठाए सवाल
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UP News : उत्तर प्रदेश में राजस्व लेखपाल भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में ओबीसी आरक्षण में विसंगति को लेकर सियासत तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश की बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में शामिल सुहेलदेव भारती समाज पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने लेखपाल भर्ती को लेकर जारी विज्ञापन में ओबीसी कोटा का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।
इससे पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी लेखपाल भर्ती में ओबीसी कोटा का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व परिषद के अध्यक्ष को ओबीसी आरक्षण से जुड़ी इन विसंगतियों को दूर करने का निर्देश दिया है।
यूपी में राजस्व लेखपाल के 7994 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है, लेकिन विज्ञापन जारी होते ही राज्य में पिछड़े वर्ग की सियासत करने वाले दलों ने इन रिक्तियों की संख्या पर सवाल उठाते हुए लेखपाल भर्ती में OBC आरक्षण के अनुरूप पद निर्धारित न किए जा का आरोप लगाना शुरू कर दिया। सपा ने लिखा कि ओबीसी के 717 पद कम कर दिए गए हैं जो कि पिछड़ी जातियों के साथ अन्याय है।
कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने योगी आदित्यनाथ को लिखी चिट्ठी में लिखा है कि यूपी में लेखपाल के 7,994 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। इस विज्ञापन में श्रेणीवार दर्शाए गए पदों में अनारक्षित (UR) - 4165, अनुसूचित जाति (SC)- 1446 अनुसूचित जनजाति (ST) - 150 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) - 1441 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) - 792 का ब्योरा दिया गया है। राजभर के पत्र के अनुसार, कुल 7994 पदों पर यदि 27% ओबीसी आरक्षण लागू किया जाए तो ओबीसी वर्ग के लिए लगभग 2158 पद निर्धारित होने चाहिए।
जबकि अधिसूचना में ओबीसी के लिए मात्र 1441 पद दर्शाए गए है, जो कि 27% आरक्षण से स्पष्ट रूप से कम हैं। इस प्रकार लगभग 717 पदों की कमी प्रतीत होती है। यह अत्यन्त चिन्ताजनक है कि जहाँ अन्य वर्गों के आरक्षण में किसी प्रकार की कटौती नहीं दिखती, यहीं केवल ओबीसी वर्ग के आरक्षण में ही कमी सामने आ रही है। इससे न केवल संविधान प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था की भावना आहत होती है, बल्कि ये करोड़ों ओबीसी युवाओं के साथ अन्याय भी है। मंत्री राजभर ने इस विसंगति को दूर करने की सीएम से मांग की है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस भर्ती में आरक्षण नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए भाजपा सरकार को घेरा है। सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया में पिछड़ों के हक की ‘हकमारी’ का दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को उनके 10% कोटे के हिसाब से पूरी 792 सीटें दी गई हैं, लेकिन ओबीसी के साथ भेदभाव हुआ है।
अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को सीधे तौर पर संबोधित करते हुए कहा, भाजपा ओबीसी के लिए संविधान द्वारा निश्चित 27% आरक्षण में से 1/3 हिस्से को नकारकर अपना असली ‘संविधान-आरक्षण विरोधी’ चेहरा दिखा रही है। अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जी सामने आएं और ओबीसी आरक्षण की हक़मारी से बचाएं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लेखपाल भर्ती में विसंगतियों को दुरूस्त करने के निर्देश के बाद राजस्व परिषद ने श्रेणीवार रिक्तियों की दोबारा समीक्षा शुरू कर दी। अब परिषद एक सप्ताह के भीतर संशोधित भर्ती प्रस्ताव अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेजेगी। आरक्षण संबंधी विसंगतियां सामने आने पर सीएम योगी आदित्यनाथ की नाराजगी ने विभाग के प्रति नाराजगी जताई है।
अब राजस्व परिषद ने कार्यरत और रिक्त पदों के श्रेणीवार आंकड़ों का दोबारा सत्यापन शुरू किया है। राजस्व परिषद की सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि प्राथमिकता के आधार पर जिलों से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों की समीक्षा की जा रही है। संशोधित भर्ती प्रस्ताव आयोग को भेजने के बाद भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और आरक्षण नियमों के मुताबिक आगे बढ़ेगी।
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने विज्ञापन संख्या 02-परीक्षा/2025 के तहत राजस्व परिषद के नियंत्रण में 7,994 रिक्त पदों पर चयन के लिए आवेदन आमंत्रित किये हैं। यह भर्ती ‘लेखपाल मुख्य परीक्षा 2025’ के माध्यम से संपन्न होनी है, लेकिन अब सीएम योगी के हस्ताक्षेप के बाद इसमें संशोधन की उम्मीद लगाआयी जा रही है।
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