पश्चिम बंगाल के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी जल्दी ही वंदे मातरम की गूंज सुनाई दे सकती है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओपी राजभर का एक बयान इसी कदम की तरफ एक इशारा है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। पश्चिम बंगाल के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी जल्दी ही वंदे मातरम की गूंज सुनाई दे सकती है। बंगाल के बाद अब यूपी भी उस फैसले की दहलीज पर खड़ा है जिसके लागू होने के बाद शिक्षा के मंदिर में राष्ट्रवाद की भावना और प्रबल होगी। प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओपी राजभर का एक बयान इसी कदम की तरफ एक इशारा है।
ओपी राजभर के बयान से मिला बड़ा संकेत
यूपी के मदरसों में अब जल्दी ही वंदे मातरम की गूंज सुनाई दे सकती है। मंत्री ओपी राजभर के बयान से यह तो स्पष्ट हो गया है कि सरकार जल्दी ही इसको लेकर सर्कुलर जारी कर सकती है। दरअसल वंदे मातरम बीते कई महीनों से देश की सियासत का जरिया बना हुआ है और उसके पीछे की सबसे बड़ी वजह वो फैसला है जो केंद्र सरकार ने 11 फरवरी को राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर लिया था।
सियासत में फिर गरमाया ‘वंदे मातरम’ मुद्दा
केंद्र सरकार का ये फैसला उन सियासी दलों को रास नहीं आया जिनकी सियासत की नींव कथित तौर पर तुष्टिकरण की सियासत पर टिकी हुई है। अब यूपी में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में अगर योगी सरकार मदरसों में वंदे मातरम गीत को अनिवार्य करती है तो यूपी की सियासत में ये एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। योगी सरकार के मंत्री ओपी राजभर ने यूपी के मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य करने के संकेत देने भर से यूपी का सियासी माहौल गरमाने लगा। कांग्रेस ने यहां तक कह दिया कि अगर ये आदेश लागू होता है तो वो इसके खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे।
बच्चों का भविष्य और भाईचारा है मकसद: योगी सरकार
इधर योगी सरकार का साफ कहना है कि उनकी मंशा मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर देना है ना कि मदरसों को सियासत का केंद्र बनाना। योगी सरकार का मानना है कि मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य करना आपसी भाईचारे के साथ ही राष्ट्रवाद की भावना को भी बढ़ाएगा। हालांकि अभी यूपी सरकार की तरफ से कोई निर्देश नहीं आया है।
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