प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

यूपी के कृषि उत्पादों को मिला ग्लोबल बाजार

योगी सरकार में यूपी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ग्लोबल बाजार की उड़ान, बस्ती से 25 हजार क्विंटल शीरा निर्यात

योगी सरकार की निर्यात नीति से यूपी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिली। बस्ती से 25 हजार क्विंटल शीरा निर्यात कर करीब 5 लाख डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित हुई। पढ़ें पूरी खबर।

योगी सरकार में यूपी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ग्लोबल बाजार की उड़ान बस्ती से 25 हजार क्विंटल शीरा निर्यात

UP molasses reaches global markets (File Photo) |

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। योगी सरकार में उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब केवल स्थानीय और घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रह गई है। प्रदेश के कृषि उत्पाद प्रसंस्करण के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपनी पहुंच बना रहे हैं। बस्ती से 25 हजार क्विंटल शीरे का विदेश निर्यात इसका एक प्रमुख उदाहरण है। इससे करीब पांच लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई है। खास बात यह है कि शीरा अलग शुल्क वर्गीकरण में आता है, इसलिए इससे हुई विदेशी मुद्रा अर्जन की राशि प्रदेश के मुख्य आबकारी निर्यात आंकड़ों से अलग है। 

उत्तर प्रदेश में गन्ने और अनाज जैसे कृषि उत्पादों से जुड़े उद्योगों को अब सिर्फ स्थानीय बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार भी उपलब्ध हो रहा है। इससे खेतों में तैयार होने वाले कच्चे माल के प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बाजार विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं। प्रदेश में गन्ना आधारित अर्थव्यवस्था का बड़ा नेटवर्क है। गन्ने से चीनी के साथ शीरा जैसे उप-उत्पाद भी तैयार होते हैं। 

योगी सरकार की निर्यात नीति से बढ़ी वैश्विक पहुंच

योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29 का जोर प्रदेश की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और निर्यात को प्रोत्साहित करने पर है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में प्रदेश के आबकारी निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 45.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी अवधि में राष्ट्रीय वृद्धि 18.3 फीसदी रही। अप्रैल-जून 2026 में यूपी का आबकारी निर्यात 127.8 लाख डॉलर तक पहुंचा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 87.9 लाख डॉलर था। यानी प्रदेश ने करीब 39.9 लाख डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की। हालांकि, बस्ती के शीरे से मिली करीब पांच लाख डॉलर की विदेशी मुद्रा अलग शुल्क वर्गीकरण के कारण इन आंकड़ों से अतिरिक्त है।

कृषि से लेकर लॉजिस्टिक्स तक जुड़ी पूरी चेन

कृषि उत्पाद का विदेश पहुंचना केवल किसान और निर्यातक के बीच का कारोबार नहीं है। इसके पीछे प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन और लॉजिस्टिक्स की पूरी श्रृंखला काम करती है। निर्यात बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना रहती है।

फैक्ट्री से विदेशी बाजार तक एक्सपोर्ट चेन हो रही तैयार

आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि प्रदेश में निर्यात बढ़ने का असर केवल आबकारी इकाइयों तक सीमित नहीं है। उद्योग की पिछली कड़ी गन्ना, शीरा और अनाज जैसे कृषि उत्पादों से जुड़ी है, जबकि आगे कांच की बोतल, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन जैसे अनेक क्षेत्र जुड़े हैं। उत्पादन और निर्यात बढ़ने के साथ इन सभी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। इससे खेत से फैक्ट्री और फैक्ट्री से विदेशी बाजार तक एक व्यापक एक्सपोर्ट चेन तैयार हो रही है।

यह भी पढ़ें: उत्तर प्रदेश में 8 सितंबर को 'आओ सुनें और सुनाएं कहानी' अभियान, बालवाटिका में मजबूत होगी साक्षरता की नींव

Related to this topic: