लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए विश्व बैंक राज्य सरकार को 28 अरब रुपये की सहायता प्रदान करेगा। इसके लिए राज्य सरकार और विश्व बैंक ने नई दिल्ली में एमओयू पर हस्ताक्षर किया है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए विश्व बैंक राज्य सरकार को 28 अरब रुपये की सहायता प्रदान करेगा। इसके लिए राज्य सरकार और विश्व बैंक ने नई दिल्ली में एमओयू पर हस्ताक्षर किया है। कार्यक्रम का फोकस मुख्य रूप से राज्य में हरित परिवहन, स्वच्छ औद्योगिक तकनीक (ईंट भट्ठों को बदलना) और कृषि में उर्वरक के बेहतर उपयोग जैसे कार्यों पर रहेगा।
$300 मिलियन के ऋण को मंजूरी
उत्तर प्रदेश में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए विश्व बैंक ने लगभग $300 मिलियन डॉलर (लगभग ₹2500-2800 करोड़) के ऋण को मंजूरी दी है। इस धनराशि का उपयोग "उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन कार्यक्रम" के अंतर्गत संचालित होगा। इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक बसें, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और बेहतर कृषि पद्धतियों के माध्यम से प्रदूषण को कम करने पर काम किया जाएगा।
200 नए मॉनिटरिंग केंद्र स्थापित होंगे
इस परियोजना के तहत राज्य भर में लगभग 200 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों से एकत्रित डेटा को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रणालियों के साथ एकीकृत किया जाएगा ताकि वायु गुणवत्ता प्रबंधन और नीतिगत निर्णयों को सुदृढ़ किया जा सके। बेहतर निगरानी से अधिकारियों को प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने और लक्षित हस्तक्षेपों को लागू करने में मदद मिलेगी।
परिवहन, उद्योग और कृषि पर फोकस
इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में एकीकृत उपायों के माध्यम से प्रदूषण को कम करना है। परिवहन क्षेत्र में, योजना वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक बसों और तीन पहिया वाहनों को अपनाने को प्रोत्साहित करती है। औद्योगिक प्रदूषण से निपटने के लिए उत्सर्जन निगरानी प्रणालियों और स्वच्छ तकनीकों को अपनाया जाएगा।
नई दिल्ली में एमओयू पर हस्ताक्षर
यूपी में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए राज्य सरकार और विश्व बैंक ने नई दिल्ली में एमओयू पर हस्ताक्षर किया है। इसके तहत स्वच्छ वायु प्रबंधन कार्यक्रम के लिए 30 करोड़ डॉलर (28 अरब रुपये) की सहायता मिलेगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य परिवहन, कृषि और उद्योग में वायु गुणवत्ता के एकीकृत समाधानों को बढ़ावा देना है।
इन अधिकारियों ने किए हस्ताक्षर
समझौता पत्र पर राज्य सरकार की ओर से स्वच्छ वायु प्रबंधन प्राधिकरण की सीईओ व वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की सचिव बी. चंद्रकला, केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक मामलों के विभाग की संयुक्त सचिव जूही मुखर्जी और विश्व बैंक की ओर से भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने हस्ताक्षर किए।
39 लाख परिवारों को मिलेगा लाभ
कार्यक्रम का एक अन्य उद्देश्य कृषि और घरेलू स्तर पर स्वच्छ प्रथाओं को बढ़ावा देना भी है। लगभग 39 लाख परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने के समाधान मिलने की उम्मीद है, जिससे घर के अंदर और बाहर वायु प्रदूषण कम होगा।
ईंट भट्ठों और किसानों को मिलेगा फायदा
किसानों को उर्वरकों का प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि फसल की उत्पादकता बढ़े और उत्सर्जन कम हो। इसके अलावा, राज्य में 700 से अधिक ईंट भट्टे संसाधन-कुशल और स्वच्छ तकनीकों की ओर अग्रसर होंगे।
निजी निवेश और रोजगार को बढ़ावा
विश्व बैंक के अनुसार, यह कार्यक्रम परिवहन और सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम क्षेत्रों में 15 करोड़ डॉलर की निजी पूंजी लाएगा। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ औद्योगिक को बढ़ावा मिलेगा। 39 लाख घरों और 700 से अधिक ईंट भट्ठों को भी इसका लाभ मिलेगा।
इंडो-गैंगेटिक प्लेन्स के लिए बड़ी पहल
यह पहल प्रदेश को वायु प्रदूषण से निपटने और सतत विकास प्राप्त करने में मजबूती देगी। यह इंडो-गैंगेटिक प्लेन्स (Indo-Gangetic Plains) में वायु गुणवत्ता सुधारने की विश्व बैंक की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
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