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बैठक में महिला सशक्तिकरण पर जोर

यूपी में महिला उद्यमिता को बढ़ावा, लखपति दीदी के लिए ₹20 हजार ब्याज मुक्त ऋण और 100 महिला शक्ति केंद्र

यूपी में महिला स्वयं सहायता समूहों को ₹20 हजार ब्याज मुक्त ऋण, 100 महिला शक्ति केंद्र, ई-रिक्शा योजना और डिजिटल सशक्तिकरण से ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने पर जोर।

यूपी में महिला उद्यमिता को बढ़ावा लखपति दीदी के लिए ₹20 हजार ब्याज मुक्त ऋण और 100 महिला शक्ति केंद्र

Focus on rural women empowerment |

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। लखनऊ स्थित योजना भवन में बुधवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में ग्राम्य विकास विभाग की उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन हुआ। बैठक में एचसीएल फाउंडेशन और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच ग्रामीण परिवर्तन को गति देने एवं उसका विस्तार करने के लिए ‘समुदाय साझेदारी’ को वर्ष 2031 तक पांच वर्षों के लिए बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई, इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण, आजीविका संवर्धन, डिजिटल समावेशन तथा सामुदायिक विकास से जुड़े प्रयासों को और विस्तार मिलने की उम्मीद है।

महिला उद्यमी क्रेडिट योजना: ₹20,000 का ब्याज मुक्त ऋण

बैठक में उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विशेष जोर दिया गया। योजना के प्रथम चरण में एक करोड़ समूह की दीदियों को ₹20,000 की पहली किश्त का क्रेडिट लाभ बिना ब्याज के उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है इस धनराशि का उपयोग महिलाएं अपने छोटे व्यवसाय को शुरू करने अथवा पहले से संचालित उद्यम को विस्तार देने में कर सकेंगी।

पारदर्शी डीबीटी (DBT) प्रणाली और महिलाओं का डिजिटल सशक्तिकरण

उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पात्र दीदियों को योजना का लाभ डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जाए, ताकि बिचौलियों की किसी भी संभावना को समाप्त किया जा सके और लाभार्थी को समयबद्ध रूप से धनराशि प्राप्त हो। बैंकिंग व्यवस्था को ग्रामीण महिलाओं के लिए और अधिक सुगम बनाया जाए तथा बैंक से संबंधित विभिन्न कार्यों को भी समूह की प्रशिक्षित दीदियों के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर कराने की संभावनाओं को बढ़ाया जाए। सरकार, बैंकिंग संस्थाओं और तकनीकी कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय से ग्रामीण महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे। तकनीक का उपयोग करते हुए समूहों की दीदियों को डिजिटल भुगतान, डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन बिक्री, वित्तीय सेवाओं और आधुनिक उद्यम प्रबंधन से जोड़ा जाए।

टीएचआर प्लांट संचालन और ई-रिक्शा योजना से स्वरोजगार

अधिकारियों को निर्देश दिए कि टीएचआर प्लांटों को पूर्णतः समूह की दीदियों के माध्यम से संचालित करने की दिशा में कार्य किया जाए। इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार, प्रबंधन का अनुभव और नियमित आय के अवसर प्राप्त होंगे। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि उत्पादन, प्रबंधन, विपणन और सेवा वितरण की जिम्मेदारी संभालने वाली ग्रामीण उद्यमी शक्ति के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। मौर्य ने सभी जिलों को निर्देशित किया कि समूह की दीदियों की आय बढ़ाने के लिए ई-रिक्शा योजना के अंतर्गत ₹2 लाख तक के उच्च गुणवत्ता वाले वाहनों की ही खरीद पर विचार किया जाए। वाहन की गुणवत्ता, महिला की आय क्षमता, बैंक ऋण सुविधा और सुरक्षित संचालन को ध्यान में रखते हुए प्रभावी मॉडल तैयार किया जाए।

स्मार्ट डिजिटल आई-कार्ड (ID) और उत्पादों की ब्रांडिंग-मार्केटिंग

बैठक में समूह की दीदियों को पहचान एवं सुविधाओं से जोड़ने के लिए आई-कार्ड उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए जो आई-कार्ड आधुनिक डिजिटल सुविधाओं से युक्त हो तथा इसमें क्यूआर कोड जैसी सुविधा उपलब्ध हो, दीदियों की आवश्यक डिजिटल जानकारी एवं सेवाओं को डीजी लॉकर जैसी सुविधाओं से युक्त हो। मौर्य ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि समूह की दीदियों द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों एवं सामग्री को सरकारी खरीद में ग्रामीण महिला समूहों की भागीदारी बढ़ने से उन्हें स्थायी बाजार मिलेगा और उनके उत्पादों की मांग बढ़ेगी, स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग को मजबूत करने के निर्देश देते हुए कहा कि गांव में तैयार होने वाले उत्पादों को प्रदेश और देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाने की प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।

अधिकारियों को सख्त निर्देश और कार्यों की साप्ताहिक निगरानी

उपमुख्यमंत्री ने ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि मुख्यालय स्तर के उच्च अधिकारी डीएमएम और बीएमएम के कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों, समूहों की प्रगति, बैंक लिंकेज, महिला उद्यमिता, ऋण वितरण, प्रशिक्षण तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रत्येक सप्ताह आख्या प्राप्त किया जाए। योजनाओं का लाभ कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका वास्तविक लाभ ग्रामीण महिलाओं के जीवन में दिखाई देना चाहिए। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए योजनाओं की जमीनी प्रगति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए लापरवाह अधिकारीयों पर होगी दंडात्मक कार्यवाही।

आय वृद्धि के लिए पशुपालन और स्थानीय संसाधनों पर जोर

उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए स्थानीय संसाधनों और गांव में उपलब्ध अवसरों का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध व्यवसाय,बकरी पालन, गाय एवं भैंस पालन तथा मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को महिला स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग और बाजार उपलब्ध कराने की समन्वित व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे महिलाओं की आय में स्थायी वृद्धि हो सके।

100 महिला शक्ति केंद्रों की स्थापना और नए क्लस्टर्स का विकास

बैठक में प्रदेश में 100 महिला शक्ति केन्द्र स्थापित करने की दिशा में तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए गए। इन केन्द्रों को ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रशिक्षण, उद्यमिता, डिजिटल सेवाओं, वित्तीय साक्षरता, बाजार संपर्क और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया जाएगा। लखनऊ और प्रयागराज में महिला समूहों के उत्पादों एवं उद्यमों के लिए क्लस्टर शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए, ताकि स्थानीय स्तर पर उत्पादों को संगठित स्वरूप, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण और बड़े बाजार से जोड़ने की सुविधा मिल सके। बैठक में भारतीय स्टेट बैंक सहित सभी सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंकों के उच्च अधिकारियों तथा 10 तकनीकी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महिला समूहों को वित्तीय एवं तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर चर्चा हुई।

'लखपति दीदी' संकल्प: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला

अंत में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘लखपति दीदी’ के संकल्प को उत्तर प्रदेश में जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार बैंक, तकनीकी संस्थाओं, निजी क्षेत्र और स्वयं सहायता समूहों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित कर रही है। आने वाले समय में गांव की दीदियां उद्यमी, उत्पादक, सेवा प्रदाता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला के रूप में अपनी पहचान बनाएंगी। उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में स्वयं सहायता समूहों की दीदियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरकार का प्रयास है कि गांव की महिला अपने हुनर और मेहनत से न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करे, बल्कि अपने गांव की अर्थव्यवस्था को भी गति दे। बैठक में ग्राम्य विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू, आयुक्त एवं सचिव प्रमोद कुमार उपाध्याय, मिशन निदेशक, तकनीकी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय स्टेट बैंक सहित समस्त सार्वजनिक क्षेत्र एवं निजी बैंकों के उच्चाधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। 

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