राज्यपाल मंगुभाई पटेल जैसे ही अपना अभिभाषण देने खड़े हुए, विपक्ष (कांग्रेस) ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर शोर-शराबा शुरू कर दिया।
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार को हंगामेदार रहा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल जैसे ही अपना अभिभाषण देने खड़े हुए, विपक्ष (कांग्रेस) ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर शोर-शराबा शुरू कर दिया। इस हंगामे के कारण राज्यपाल अपना पूरा भाषण नहीं पढ़ सके और बीच में ही सदन से चले गए।
अभिभाषण में बाधा
राज्यपाल ने सुबह 11:12 बजे भाषण पढ़ना शुरू किया था, लेकिन 11:20 बजे से ही विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। करीब 17 मिनट तक राज्यपाल ने शोर-शराबे के बीच भाषण पढ़ा और अंततः 11:27 बजे वे सदन से प्रस्थान कर गए।
इंदौर का मुद्दा उठा
हंगामा तब शुरू हुआ जब राज्यपाल ने उज्जैन में क्षिप्रा नदी को दूषित पानी से बचाने के लिए 919 करोड़ की 'कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना' का उल्लेख किया। इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि जब सरकार उज्जैन की बात कर रही है, तो इंदौर में दूषित पानी से हुई 38 मौतों (विपक्ष के दावे अनुसार) पर चुप क्यों है?
सरकार की लापरवाही का मुद्दा उठाया
कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मंत्री विजय शाह के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का आरोप था कि राज्यपाल के भाषण में उन परिवारों के दर्द का कोई जिक्र नहीं था जिन्होंने अपनों को खोया है।
शेष भाग को भी पढ़ा हुआ माना जाएगा
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने घोषणा की कि राज्यपाल के अभिभाषण के शेष भाग को "पढ़ा हुआ" माना जाएगा। इसके बाद सदन की कार्यवाही राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के साथ आगे बढ़ी। वरिष्ठ विधायक अजय बिश्नोई ने राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन अर्चना चिटनीस ने किया। सरकार ने कोर्ट में दी गई रिपोर्ट में 16 मौतों की पुष्टि की है, जबकि विपक्ष यह संख्या अधिक बता रहा है। इस सत्र में 18 फरवरी को राज्य का बजट पेश होना है।
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