उत्तर प्रदेश की योगी सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने को लेकर काफी संवेदनशील है। यही कारण है कि यूपी कृषि ऋण वितरण के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने को लेकर काफी संवेदनशील है। यही कारण है कि यूपी कृषि ऋण वितरण के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। राज्य में कृषि क्षेत्र को बैंकों ने लगभग 2.12 लाख करोड़ का ऋण दिया है। ये तथ्य भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट में सामने आए हैं।
2.82 लाख करोड़ रुपये के कृषि लोन वितरण के साथ पहले स्थान पर आंध्र प्रदेश
रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश से ऊपर सिर्फ आंध्र प्रदेश का स्थान है। आंध्र प्रदेश 2.82 लाख करोड़ के साथ प्रथम स्थान पर है, जबकि कर्नाटक 1.99 लाख करोड़ के साथ तीसरे स्थान पर है। आरबीआई की रिपोर्ट और उससे जुड़े राज्य-कार सांख्यिकीय आंकड़े उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की दोहरी तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। एक ओर राज्य देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है। वहीं दूसरी ओर प्रति व्यक्ति आग और उत्पादक रोजगार अब भी बड़ी चुनौती है।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष पांच राज्यों महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और मुजरात में शामिल हो गया है। यूपी का सकल राज्य घरेलू उत्पाद लगभग 26.6 लाख करोड़ रुपये है। इससे यूपी यह आंकड़ा राज्य की आर्थिक क्षमता और गतिविधियों के विस्तार को दर्शाता है।
राज्य में ग्रामीण और अर्थ-शहरी क्षेत्रों में जमा-ऋण अनुपात में हुआ सुधार
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान हाल के महीनों में बढ़ा है। राज्य में ग्रामीण और अर्थ-शहरी क्षेत्रों में जमा-ऋण अनुपात में सुधार हुआ है। इससे स्पष्ट है कि ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को वित्तीय सहायता पर्याप्त रूप से मिल रही है। कृषि का उत्तर प्रदेश अर्थव्यवस्था में योगदान बढ़कर लगभग 16.8 प्रतिशत हो गया है। यह दर्शाता है कि कृषि क्षेत्र की मजबूती बैंक ऋण के प्रभाव की समर्थन दे रही है।
औद्योगिक रोजगार में हुई है 5 से 7 प्रतिशत की वृद्धि
उत्तर प्रदेश में सिर्फ कृषि ही नहीं औद्योगिक इकाइयों का विस्तार भी हुआ है जिससे रोजगार बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश में लगभग 4000 नए कारखाने स्थापित किए गए, जिससे कुल औद्योगिक इकाइयों की संख्या 27000 से अधिक हो गई। औद्योगिक रोजगार में 5 से 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि उच्च मूल्य काले और अधिक उत्पादक उद्योगों का हिस्सा सीमित है, जिससे प्रति व्यक्ति आप पर अपेक्षित असर सीमित रहा है।
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