उत्तर प्रदेश में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए महिला आर्थिक सशक्तिकरण सूचकांक 2.0 के आधार पर जेंडर एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। लखनऊ में मुख्य सचिव एस.पी.गोयल की अध्यक्षता में महिला आर्थिक सशक्तिकरण सूचकांक (Women’s Economic Empowerment Index-2.0) के संबंध में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सूचकांक के निष्कर्षों के आधार पर महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में विद्यमान कमियों की पहचान, उनके कारणों के विश्लेषण तथा संबंधित विभागों द्वारा किए जाने वाले सुधारात्मक उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई। यह बैठक राज्य में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को गति देने और नीतिगत स्तर पर सुधार लाने के लिए बुलाई गई थी।
सूचकांक को बनाया जाए नीति का आधार
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि महिला आर्थिक सशक्तिकरण सूचकांक को केवल आंकड़ों के मूल्यांकन तक सीमित न रखते हुए विभागीय नियोजन एवं नीतिगत निर्णयों का आधार बनाया जाए। इसके लिए प्रत्येक संबंधित विभाग सूचकांक के निष्कर्षों के आधार पर जनपदवार जेंडर एक्शन प्लान (Gender Action Plan-GAP) तैयार करे। कार्ययोजना में चिन्हित कमियों के कारण, उनके समाधान के लिए प्रस्तावित हस्तक्षेप, मापनीय लक्ष्य, समय-सीमा तथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाए।
कम भागीदारी वाले जनपदों पर फोकस
उन्होंने कहा कि जिन जनपदों में महिलाओं की भागीदारी कम अथवा शून्य है, वहां इसके वास्तविक कारणों का विश्लेषण किया जाए। इसमें जागरूकता एवं प्रचार-प्रसार की कमी, विभागीय क्रियान्वयन क्षमता, आधारभूत सुविधाओं एवं आवागमन की उपलब्धता, छात्रावास एवं बाल देखभाल सुविधाओं का अभाव, पात्रता एवं दस्तावेजीकरण संबंधी बाधाओं तथा आंकड़ों के संकलन एवं सत्यापन में संभावित त्रुटियों की जांच शामिल हो। साथ ही, उच्च प्रदर्शन करने वाले जनपदों की सफल कार्यप्रणालियों का अध्ययन कर उन्हें अन्य जनपदों में भी लागू किया जाए।
एमएसएमई और उद्यमिता में प्रोत्साहन
बैठक में एमएसएमई क्षेत्र में महिलाओं की उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि उद्यम (Udyam) पंजीकरण में महिलाओं की कम भागीदारी वाले जनपदों में जिला उद्योग केंद्रों (DICs), कॉमन सर्विस सेंटर (CSCs) तथा स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से विशेष पंजीकरण अभियान संचालित किए जाएं।
उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं को पंजीकरण प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में जागरूक करने के साथ-साथ आवश्यक सहयोग भी उपलब्ध कराया जाए। जिन जनपदों में महिला पंजीकरण शून्य है, वहां इस स्थिति को समाप्त करते हुए महिलाओं की भागीदारी राज्य के औसत स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया जाए।
ऋण योजनाओं में पारदर्शिता और तेजी
इसी प्रकार, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), एक जनपद एक उत्पाद (ODOP), मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना (MYSY) तथा अन्य ऋण एवं मार्जिन मनी सहायता योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष ऋण शिविर एवं आवेदन सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं। जिला उद्योग केंद्रों एवं बैंकिंग संस्थानों के समन्वय से महिलाओं को आवेदन प्रक्रिया में सहयोग प्रदान किया जाए। ऋण आवेदनों के निस्तारण की अधिकतम समय-सीमा 14 दिवस निर्धारित करते हुए जनपदवार आवेदन एवं स्वीकृति की नियमित समीक्षा की जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन जनपदों में विशिष्ट एमएसएमई क्षेत्रों एवं ओडीओपी उत्पादों की मूल्य श्रृंखला में महिलाओं की भागीदारी कम है, वहां क्लस्टर आधारित सहयोग, कौशल प्रशिक्षण, बाजार संपर्क तथा उद्यम इनक्यूबेशन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि अधिकाधिक महिलाएं उद्यमिता से जुड़ सकें।
प्राथमिकता वाले पांच विभाग चिन्हित
बैठक में आगामी चरण के लिए व्यावसायिक शिक्षा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), श्रम, प्राविधिक शिक्षा तथा ग्राम्य विकास विभाग को प्राथमिकता वाले विभागों के रूप में चिन्हित किया गया। इन विभागों को अपने-अपने क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी से संबंधित कमियों की पहचान कर लक्षित हस्तक्षेप एवं स्पष्ट परिणामों के साथ कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
डैशबोर्ड से होगी प्रगति की निगरानी
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि महिला आर्थिक सशक्तिकरण सूचकांक के डैशबोर्ड का नियमित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। इसके माध्यम से संकेतकवार प्रगति, जनपदों के प्रदर्शन तथा महिलाओं की भागीदारी में विद्यमान अंतराल का विश्लेषण कर विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों में आवश्यक सुधार किए जाएं। प्रत्येक विभाग अपने नोडल अधिकारी एवं जनपद स्तरीय अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए मासिक समीक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
योजनाओं में जेंडर डेटा का समावेश
मुख्य सचिव ने जेंडर डेटा एंड डेवलपमेंट (Gender Data & Development-GDD) की अवधारणा को सभी विभागीय योजनाओं में समाहित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं के निर्माण, लाभार्थियों के चयन, क्रियान्वयन, निगरानी एवं मूल्यांकन के प्रत्येक चरण में लैंगिक दृष्टिकोण को शामिल किया जाए। इसके लिए महिला एवं पुरुष लाभार्थियों से संबंधित पृथक आंकड़ों का संकलन, सत्यापन एवं नियमित विश्लेषण सुनिश्चित किया जाए, ताकि योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का आकलन कर आवश्यक सुधार किए जा सकें।
उन्होंने कहा कि महिला आर्थिक सशक्तिकरण सूचकांक का उद्देश्य महिलाओं की रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार एवं उद्यमिता संबंधी गतिविधियों में वास्तविक भागीदारी बढ़ाना है। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्रम डॉ. आशीष कुमार गोयल, प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य वी.हेकाली झिमोमी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
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