इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी प्रकार के आपराधिक मामले में तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया के दौरान ऑडियो-वीडियो की रिकॉर्डिंग अनिवार्य है।
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी प्रकार के आपराधिक मामले में तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया के दौरान ऑडियो-वीडियो की रिकॉर्डिंग अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए राज्य में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने का निर्देश दिया है।
ई-साक्ष्य पोर्टल पर अपलोड करना होगा डाटा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा-105 और उत्तर प्रदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा नियमावली-2024 के तहत तलाशी, बरामदगी और जब्ती की वीडियोग्राफी आवश्यक है। इसे ई-साक्ष्य पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रावधानों का पालन नहीं करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट ने शादाब की जमानत अर्जी पर दिया यह आदेश
यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने शादाब की जमानत अर्जी पर दिया है। मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर थाने में याची शादाब पर विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अभियोजन का दावा था कि आरोपी और अन्य सह-आरोपियों के पास से 40 बाइक बरामद की गई थीं। आरोपी ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अब वैकल्पिक नहीं, अनिवार्य
अधिवक्ता ने दलील दी कि याची को मामले में झूठा फंसाया गया है और सह आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। साथ ही यह भी दलील दी कि नियमानुसार बरामदगी की वीडियोग्राफी नहीं कराई गई है। इससे मामला संदिग्ध प्रतीत होता है। वहीं, कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि बीएनएसएस की धारा-105 के तहत तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य है।
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