भागलपुर में गंगा नदी पर बने इस सेतु के दो खंभों के बीच का एक स्लैब अचानट टूटकर नदी में समा गया। गनीमत यह रही कि इस दुर्घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है।
भागलपुर (बिहार)। बिहार में पुलों के गिरने का सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी अब विक्रमशिला सेतु का भी नाम जुड़ गया है। भागलपुर में गंगा नदी पर बने इस सेतु के दो खंभों के बीच का एक स्लैब अचानट टूटकर नदी में समा गया। गनीमत यह रही कि इस दुर्घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है।
भागलपुर और नवगछिया की तरफ से पुल सील
इस घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। यह दुर्घटना ऐसे समय हुई जब विक्रमशिला सेतु पर वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी की वजह से एक बड़ी दुर्घटना टल गई। फिलहाल, विक्रमशिला सेतु को नवगछिया और भागलपुर, दोनों तरफ से पूरी तरह सील कर दिया गया है। बता दें कि विक्रमशिला सेतु गंगा नदी पर बना एक लंबा पुल है जो भागलपुर को 16 ज़िलों से जोड़ता है। इनमें सीमांचल क्षेत्र के ज़िले भी शामिल हैं।
मौके पर पहुंचे आला अधिकारी, ट्रैफिक को किया गया डायवर्ट
घटना की जानकारी मिलते ही आनन फानन में ज़िलाधिकारी नवल किशोर चौधरी, SSP प्रमोद कुमार यादव, सदर SDM विकास कुमार, सिटी DSP अजय कुमार चौधरी और ट्रैफिक DSP संजय कुमार तुरंत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने एहतियातन इलाके में वाहनों की आवाजाही रोक दी है और ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है।
पहले ही दिखे थे खतरे के संकेत
फिलहाल, इस घटना के बाद से विक्रमशिला सेतु को वाहनों की आवाजाही के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक देर शाम ही 10 इंच का एक 'एक्सपेंशन जॉइंट' (जोड़) नीचे धंसा हुआ देखा गया था। लेकिन इससे पहले की उसपर कोई कुछ करता, देर रात खंभा नंबर 133 के पास का स्लैब अचानक ध्वस्त हो गया।
डीएम ने बताया कैसे टली बड़ी दुर्घटना
पत्रकारों से बात करते हुए DM नवल किशोर चौधरी ने बताया कि, "रात करीब 12:35 बजे, खंभा नंबर 133 के पास एक स्लैब नीचे धंसने लगा। हमारे स्थानीय अधिकारी और SHO की सूझबूझ की वजह से, लोगों को वहां से सुरक्षित निकाल लिया गया। जैसे ही लोगों को वहां से हटाया गया, उसके 15 मिनट के अंदर ही वह स्लैब गंगा नदी में जा गिरा। उस स्लैब पर कोई वाहन मौजूद नहीं था। पुल को भागलपुर और नवगछिया, दोनों तरफ से सील कर दिया गया है। वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। हम रात के समय कोई वैकल्पिक रास्ता शुरू नहीं कर सकते। जो लोग भागलपुर आना चाहते हैं, वे मुंगेर की तरफ से आ सकते हैं। हम किसी वैकल्पिक व्यवस्था की तलाश कर रहे हैं।"
पहले भी उठ चुके थे सुरक्षा पर सवाल
गौरतलब है कि विक्रमशिला सेतु से रोज़ाना लाखों लोग आवाजाही करते हैं। यहां से गुज़रने वाले वाहनों की संख्या 30 हजार से भी अधिक है। इस पुल का निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल के दौरान हुआ था। पुल के विस्तार जोड़ों (expansion joints) में बार-बार आने वाली दरारों ने पहले इसकी संरचनात्मक मज़बूती को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। अभी कुछ ही दिन पहले, पुल के बेयरिंग में नुक़सान होने की ख़बरें सामने आई थीं। हालाँकि, प्रशासन ने इन दावों को ख़ारिज करते हुए कहा था कि पुल से किसी भी तरह का कोई सुरक्षा जोखिम नहीं है।
ANI
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