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ग्रामीणों ने चंदा से स्कूल बनाना शुरू किया

एक साल तक नहीं बना स्कूल, ग्रामीणों ने चंदा और श्रमदान से खुद शुरू किया निर्माण

डिंडौरी के भालापुरी शिकारी टोला में एक साल तक स्कूल न बनने पर ग्रामीणों ने हर घर से 500 रुपये चंदा जुटाकर और श्रमदान से खुद स्कूल निर्माण शुरू किया।

एक साल तक नहीं बना स्कूल ग्रामीणों ने चंदा और श्रमदान से खुद शुरू किया निर्माण

Villagers Start School Construction After One Year Delay |

डिंडौरी {मध्य प्रदेश}: जिले के समनापुर विकासखंड के भालापुरी के शिकारी टोला ने जिला प्रशासन को आईना दिखाने वाली मिसाल पेश की है। एक साल तक आवेदन, गुहार और इंतजार के बाद भी जब स्कूल भवन नहीं बना, तो ग्रामीणों ने सरकार का इंतजार छोड़ खुद जिम्मेदारी उठा ली। हर घर से 500-500 रुपये का चंदा इकट्ठा किया और श्रमदान के साथ नए स्कूल भवन का निर्माण शुरू कर दिया, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

एक साल पहले तोड़ दिया गया था स्कूल भवन

बीते वर्ष जर्जर प्राथमिक शाला भवन को डिस्मेंटल कर दिया गया था। इसके बाद पालकों ने अपने स्तर पर झोपड़ी बनाकर स्कूल का संचालन शुरू कराया। उस समय इस गंभीर समस्या को मीडिया ने भी प्रमुखता से उठाया था, लेकिन एक साल बीत जाने के बावजूद जिला प्रशासन ने स्थायी स्कूल भवन के निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

एक कमरे में पढ़ रहे हैं 52 बच्चे

फिलहाल पहली से पांचवीं तक के 52 बच्चों की पढ़ाई एक मकान के सिर्फ एक कमरे में कराई जा रही है। सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ पढ़ाना पड़ रहा है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। शिक्षिका का कहना है कि इस व्यवस्था में बच्चों को पढ़ाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने खुद संभाली जिम्मेदारी

प्रशासन की उदासीनता से परेशान ग्रामीणों ने तय किया कि बच्चों का भविष्य सरकारी फाइलों में नहीं अटकेगा। इसके बाद हर परिवार ने 500-500 रुपये का योगदान दिया और श्रमदान के जरिए स्कूल भवन का निर्माण शुरू कर दिया।

प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल

चंदा और श्रमदान से शुरू हुआ यह निर्माण कार्य ग्रामीणों की जागरूकता और शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का उदाहरण है। वहीं, यह प्रशासन की कार्यशैली पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। अब सवाल यह है कि जब ग्रामीण अपने दम पर स्कूल बना सकते हैं, तो करोड़ों रुपये के बजट वाला जिला प्रशासन अब तक क्या करता रहा?

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